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UP: पहले नवादा में हुई थी महंत की पिटाई, फिर डेरे से भाग गया था नरेशनाथ, अब कर रहा था चुनाव लड़ने की तैयारी

Fri, 14 Aug 2026 06:36 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत

सार

बागपत में दोहरे हत्याकांड के आरोपी साधु नरेशनाथ को लेकर ग्रामीणों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सट्टे के नंबर, तंत्र क्रिया और झूठे वादों के जरिए वह लोगों के बीच अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। इससे पहले भी ग्रामीण उसे अलग-अलग गांवों और डेरों से भगा चुके थे।
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बागपत डबल मर्डर का आरोपी साधु - फोटो : अमर उजाला
बागपत जनपद में रटौल थाना क्षेत्र के लहचौड़ा गांव के श्रीगणेश मंदिर परिसर में अंकित प्रजापति और इसरार की हत्या के बाद आरोपी साधु नरेशनाथ की पुरानी गतिविधियां सामने आने लगी हैं। ग्रामीणों के अनुसार नरेशनाथ सट्टे के नंबर बताने और तंत्र क्रिया के नाम पर लोगों से रुपये लेने के साथ धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ा रहा था।

उसके पास दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों से लोग सट्टे के नंबर लेने आते थे। रकम को लेकर कई बार विवाद भी हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि उसके तौर-तरीकों से परेशान होकर पहले नवादा गांव और बाद में सिंगौली तगा के डेरे से भी उसे भगाया गया था।

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बागपत डबल मर्डर - फोटो : अमर उजाला
सट्टे के नंबर और तंत्र क्रिया से बढ़ाया प्रभाव
सिंगौली तगा के ग्रामीण अंकुश और विकास के अनुसार नरेशनाथ दिसंबर 2025 में बाबा हरनामदास महाराज के डेरे पर आया था। वहां पहुंचने के बाद उसने सीसीटीवी कैमरे, वातानुकूलित यंत्र, बड़ी दूरदर्शन मशीन, कपड़े धोने की मशीन समेत कई सुविधाएं जुटा लीं।

उसके परिचितों का भी डेरे पर आना-जाना बढ़ गया। दिनभर बाहरी लोगों की आवाजाही और रात में महिलाओं के आने से ग्रामीणों को परेशानी होने लगी। आरोप है कि नरेशनाथ ने गांव के कई लोगों से तंत्र क्रिया के नाम पर रुपये लिए। रुपये वापस मांगने पर विवाद भी हुआ।
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बागपत डबल मर्डर - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों के अनुसार नरेशनाथ सट्टे के नंबर भी बताता था। उसके पास दूर-दराज के राज्यों से लोग नंबर लेने पहुंचते थे। सट्टे की रकम को लेकर भी उसका लोगों से विवाद हुआ। यही कारण था कि वह गांव में धीरे-धीरे प्रभाव बढ़ाने के साथ विवादों में भी घिरता गया।

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बागपत में दो दोस्तों की हत्या - फोटो : अमर उजाला
गांव से चुनाव लड़ने की भी कर रहा था तैयारी
ग्रामीण विकास ने बताया कि नरेशनाथ मूल रूप से कहां का रहने वाला है, इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। कुछ समय बाद एक जनप्रतिनिधि की मदद से उसने अपने पहचान पत्र में पता सिंगौली तगा का करा लिया था। इसके बाद वह गांव से चुनाव लड़ने की बात भी करने लगा था। ग्रामीणों से मिलकर चुनाव की तैयारी करने की चर्चा करता था।
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बागपत डबल मर्डर - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों का आरोप है कि उसने लोगों का भरोसा जीतने के लिए अपनी पहचान को लेकर भी अलग-अलग बातें बताईं। सिंगौली तगा और लहचौड़ा गांव में एक विशेष जाति की आबादी अधिक होने के कारण उसने खुद को उसी जाति का बताकर लोगों का विश्वास हासिल करने की कोशिश की। बाद में अपनी जाति को लेकर अलग-अलग जानकारी देने लगा। ग्रामीणों के मुताबिक वह खुद को अविवाहित बताता था, जबकि उसकी पत्नी और बेटा भी उसके आसपास ही रहते थे।
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मौके पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला
पहले नवादा में पिटा, फिर डेरे से भी भगाया गया
दोहरे हत्याकांड के बाद पुलिस नरेशनाथ की पुरानी गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है। ग्रामीणों के अनुसार करीब चार साल पहले वह पूरनपुर नवादा गांव के शिव मंदिर में करीब पांच महीने रहा था। वहां तंत्र क्रिया और साधना के नाम पर महिलाओं को अपने साथ नचाने के आरोपों को लेकर ग्रामीणों ने विरोध किया था। मामला बढ़ने पर ग्रामीणों ने उसकी पिटाई भी की और बाद में समझौते के बाद उसे मंदिर से भगा दिया गया।

इसके बाद वह गाजियाबाद के गनौली गांव में अपने परिचित के यहां रहा। दिसंबर 2025 में ग्रामीणों की सिफारिश के बाद वह सिंगौली तगा स्थित बाबा हरनामदास महाराज के डेरे पर पहुंचा। यहां भी उसने धर्मशाला में बदलाव कराए, हवनकुंड तुड़वाकर दूसरा कुंड बनवाया और तांत्रिक क्रिया शुरू कर दी।
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बागपत दोहरा हत्याकांड, इसरार अंकित हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों के मुताबिक रात में महिलाओं को बुलाने और देर रात तक गाने बजाने को लेकर भी आपत्ति हुई। बाद में उसने डेरे में एक गुप्त कमरा बनवाने और बाबा हरनामदास की कोठरी से जोड़कर शौचालय बनाने का काम शुरू कराया। विरोध बढ़ने पर करीब दो माह पहले ग्रामीणों ने उसे डेरे से भगा दिया।
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बागपत दोहरा हत्याकांड, इसरार अंकित हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
सामान लेकर दोबारा डेरे में पहुंचा था
ग्रामीण विकास के अनुसार डेरे से निकाले जाने के कुछ दिन बाद नरेशनाथ अपने कुछ साथियों के साथ गाड़ी लेकर वहां पहुंचा। उसने अपना सामान तो उठाया ही, साथ में डेरे में लगे पंखे, लोहे का सामान, बर्तन और भंडारे का सामान भी ले गया। ग्रामीणों का आरोप है कि वह कोठरी की चौखट उखाड़ने का प्रयास भी कर रहा था, लेकिन विरोध होने पर ऐसा नहीं कर सका।

इसके बाद नरेशनाथ लहचौड़ा के श्रीगणेश मंदिर में रहने लगा। पुलिस के अनुसार इसी परिसर में 25 जुलाई को उसने उज्ज्वल समेत अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अंकित और इसरार को नशीली गोलियां खिलाकर बेहोश किया और जहर का इंजेक्शन लगाने के बाद गड्ढे में दबा दिया। अब पुलिस उसके पुराने ठिकानों और वहां की गतिविधियों की भी जानकारी जुटा रही है।
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