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कांवड़ लाने वाले बाबू खान का दर्द: ...साहब मेरा तीन साल का मानदेय रोक दिया, SDM ने सुनी पूरी कहानी

Thu, 04 Aug 2022 09:26 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, बागपत
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बाबू खान। - फोटो : amar ujala
हरिद्वार से कांवड़ लाने वाले रंछाड़ गांव के बाबू खान को परेशान किया जा रहा है। बाबू खान का आरोप है कि कांवड़ लाने से नाराज कुछ लोगों ने उसका तीन साल का चौकीदारी का मानदेय रोक दिया है और पुलिस भी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। वह गुरुवार को तहसील पहुंचा और एसडीएम से शिकायत की।

रंछाड गांव निवासी बाबू खान गुरुवार को तहसील पहुंचा। उसने एसडीएम सुभाष व तहसीलदार हर्ष चावला से शिकायत करते हुए बताया कि गांव स्थित बड़ी मस्जिद व कब्रिस्तान पर चौकीदारी का काम करता है।
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बाबू खान। - फोटो : amar ujala
आरोप लगाया कि जब से हरिद्वार से कांवड़ लेकर आने लगा, तभी से लगभग तीन साल से मानदेय के रूप में मिलने वाले 4500 रुपये रोक दिए गए हैं। हरिद्वार से कांवड़ लाना कुछ लोगों को पसंद नहीं है। इसलिए लोग परेशान करना चाहते हैं। एसडीएम सुभाष सिंह ने बिनौली इंस्पेक्टर से बातचीत कर समस्या का शीघ्र समाधान कराएं जाने का आश्वासन दिया।
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बाबू खान। - फोटो : amar ujala
बाबू खान पर हुआ था हमला
2019 में बाबू खान पर जानलेवा हमला हुआ था। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। बताया गया कि बाबू खान द्वारा कावड़ लाने का उसके परिवार के लोग विरोध करते थे। वहीं 29 सितंबर 2019 को वह घर में भगवान शिव की पूजा कर रहा था। इसी दौरान परिवार के चार लोगों ने उस पर लाठी-डंडों व धारदार हथियारों से हमला कर दिया था।

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कांवड़ लेकर निकले बाबू खान - फोटो : अमर उजाला
बाबू खान का कहना है कि इस्लाम हमें सभी धर्मों का सम्मान करने की सीख देता है। बाबू खान बताते हैं कि वह सुबह पांच बजे गांव की मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं और फिर शिव मंदिर पर जाकर साफ-सफाई करते हैं।
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बाबू खान का स्वागत करते लोग। - फोटो : amar ujala
बाबू खान का कहना है, मैंने इस्लाम धर्म नहीं छोड़ा है, सिर्फ कांवड़ लाने में आस्था है। इसलिए हर साल कांवड़ लेने के लिए हरिद्वार जाता हूं।
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