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Dhanteras 2025: आजमगढ़ की सड़कों पर जाम ही जाम...गलियां भी रहीं ठसाठस, जमकर हुई खरीदारी; सुरक्षा दुरुस्त

Sun, 19 Oct 2025 05:54 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

धनतेरस की खरीदारी के बीच आजमगढ़ की प्रमुख सड़कों पर लोग जाम का दंश झेलते रहे। जिला प्रशासन की टीम जगह-जगह यातायात की व्यवस्था को संभालता रहा। दोपहर बाद से ही सड़कों से लेकर गलियां तक जाम से पट गई थीं।
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जाम के बीच रास्ता ढूंढते लोग। - फोटो : अमर उजाला
धनतेरस पर शनिवार को शहर जाम में फंसा रहा। नो एंट्री के बाद भी वीआईपी गाड़ियों के मध्य शहर में प्रवेश कर जाने से लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे। सड़कों के किनारे वाहनों को खड़ा कर देने से यातायात पुलिस भी जाम से निजात दिलाने के बजाय वीआईपी गाड़ियों को रास्ता देने में जुटी रही।
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बर्तनों की जमकर हुई खरीदारी। - फोटो : अमर उजाला
धनतेरस के अवसर पर शहर में सड़कों की पटरियां दुकानों से ही पट गई थी। दुकानदारों ने आधी सड़क अतिक्रमण कर रखा था। सुबह से ही लोग मिठाई और लक्ष्मी, गणेश की मूर्तियों सहित बर्तन आदि की खरीदारी के लिए निकल पड़े थे। शाम होने पर लक्ष्मी पूजा के लिए खरीदारी को लोगों को रेला उमड़ पड़ा था। 
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लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां भी बिकीं। - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान नो इंट्री के बाद भी वीआईपी लोगों के वाहनों का शहर के मध्य क्षेत्र में आना-जाना जारी रहा। यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शहर के विभिन्न चौराहों और तिराहों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस उस समय पीछे हट जा रही थी, जब कोई वाआईपी वाहन दिखाई देता था। प्रतिबंध के बाद भी वाहनों के प्रवेश कर जाने से दिन भर यातायात व्यवस्था चरमराती रही।

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बच्चों ने रंगोली के लिए खरीदे रंग। - फोटो : अमर उजाला
धनतेरस पर सूरन की बिक्री, सौ रुपये किलो तक पहुंची
धनतेरस पर सूरन की सब्ज़ी का अलग महत्व है। इसे समृद्धि, विकास और धन-संपत्ति का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि सूरन कटने के बाद भी दोबारा उगता है, जो निरंतर बढ़ती समृद्धि का प्रतीक है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, इसमें देवी लक्ष्मी का निवास होता है, इसलिए इसे खाने और भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। सामान्य दिनों में 30-40 रुपये प्रति किलो बिकने वाला सूरन इस धनतेरस पर 100 से 80 रुपये प्रति किलो तक बिक गया।
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जाम में फंसे वीआईपी। - फोटो : अमर उजाला
सबसे महंगी मूर्ति नौ हजार तो सबसे कम 100 रुपये की थी
आजमगढ़ जिले में धनतेरस पर बाजार गुलजार रहे। सुबह से बाजार में चहल-पहल रही। दोपहर बाद शहर का हर हिस्सा जाम की चपेट में रहा। उधर सबसे ज्यादा लोगों ने लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की खरीदारी की।
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ज्वेलरी शाॅप भी रहे गुलजार। - फोटो : अमर उजाला
शहर के एक मूर्ति विक्रेता ने बताया कि उनके पास सबसे बड़ी और एक फिट ऊंची मूर्ति की कीमत लगभग 9,000 रुपये थी, जबकि सबसे छोटी और सस्ती मूर्ति केवल 100 रुपये की थी। वहीं दीपावली पर घरों को सजाने और रोशन करने के लिए दीयों की बाती की खरीदारी भी बाजार में जमकर हुई। इस बार रुई की लच्छी दस रुपये प्रति मीटर की दर से उपलब्ध थी। इसके साथ ही रेडीमेड बाती के पैकेट भी दस से बीस रुपये की कीमत में बिक रहे थे।
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मूर्तियों की खरीदारी करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
धनतेरस पर रंगोली बनाने के सामग्री की जमकर हुई बिक्री
दीपावली पर रंगोली बनाने का विशेष महत्व है। धनतेरस पर बाजार में रंगोली बनाने के लिए रंग, डिजाइनर जालियां आदि बिक रहे थे। दस ग्राम का पैकेट जहां 20 से 30 रुपये में बिका, वहीं जालियां छोटी-बड़ी आकार की थी। जिसमें सबसे छोटी जाली जहां दस रुपये की थी, वहीं बड़ी जाली सौ रुपये की बिकी। इसी प्रकार अन्य जालियां 20, 40, 60 रुपये की थी। दुकानदारों का कहना था कि पर्व में रंगोली सजाने के प्रति उत्साह बढ़ा है और इसीलिए सभी प्रकार की सामग्री की बिक्री में अच्छा कारोबार हुआ।
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दीपावली की खरीदारी करती महिला। - फोटो : अमर उजाला
धनतेरस पर मोर पंखी की खरीदारी का रौनक
आजमगढ़। बाजार में तरह-तरह के आकर्षक मोर पंखी बिक्री के लिए उपलब्ध थे। छोटी मोर पंखी दस रुपये में उपलब्ध थी, जबकि बड़ी मोर पंखी की कीमत 20 रुपये थी। इसके अलावा, डिजाइनर मोर पंखी की कीमतें 50, 70 और 80 रुपये तक थी। स्थानीय लोगों का मानना है कि मोर पंखी को घर और पूजन स्थल पर रखने से सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि धनतेरस पर मोर पंखी की खरीदारी में भारी भीड़ देखने को मिली।
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