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राम मंदिर: पांच वर्षों की अविराम साधना से खड़ा हो गया सनातन का शिखर; बाधाएं आईं पर न श्रम रुका, न विश्वास डिगा

Thu, 17 Sep 2026 08:02 PM IST
Bhupendra Singh नितिन मिश्र, अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

पांच वर्षों की अविराम साधना से सनातन का शिखर राम मंदिर खड़ा हो गया है। बाधाएं आईं पर न श्रम रुका और न विश्वास डिगा। 1400 करोड़ की लागत से रामलला का आशियाना बनकर तैयार हो गया है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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राम मंदिर: पांच वर्षों की अविराम साधना से खड़ा हो गया सनातन का शिखर - फोटो : अमर उजाला
पांच साल की निरंतर तपस्या, तकनीक और श्रम-साधना के बाद लगभग 1400 करोड़ रुपये की लागत से अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर पूर्णता को प्राप्त कर चुका है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि राम मंदिर का निर्माण अब पूरा हो चुका है। मंदिर निर्माण की कार्यदायी संस्थाओं के अंतिम भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 

राम मंदिर निर्माण की यात्रा आसान नहीं रही। भूमि पूजन 05 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। उस शुभ क्षण से लेकर आज तक निर्माण एक भी दिन नहीं रुका। बारिश, ठंड, कोरोना महामारी और तकनीकी चुनौतियां सब आईं, पर न अविरल श्रम रुका, न ही विश्वास डिगा। 
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राम मंदिर - फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
निर्माण के दौरान कई बार धरातलीय बाधाएं सामने आईं। मंदिर की नींव के लिए जब प्रारंभिक टेस्ट पाइलिंग की गई, वह तकनीकी रूप से विफल सिद्ध हुई। इंजीनियरों ने पाइलिंग किए गए खंभों पर व भूकंप जैसे झटके दिए तो खंभों में दरार आ गईं। इसके चलते इंजीनियरों को नींव की डिजाइन फिर से बनानी पड़ी। इसमें छह महीने लग गए। नई नींव में आरसीसी (रोलर कंपैक्ट कंक्रीट) का उपयोग किया गया। नींव इस तरह तैयार की गई है कि यह हजारों वर्षों तक बिना क्षति के टिक सके।
 
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अयोध्या राम मंदिर निर्माण कार्य। - फोटो : अमर उजाला।
खोदाई के दौरान गहराई में मिली पुरातात्विक परतें, पत्थर संरचना के लिए उच्च गुणवत्ता वाले शिलाखंडों की उपलब्धता... लेकिन हर चुनौती का समाधान अदम्य संकल्प के साथ निकला। भूमि पूजन के बाद शुरू हुए कार्य में देशभर के चार हजार से अधिक शिल्पियों, इंजीनियरों, कारीगरों और श्रमिकों ने योगदान दिया। 
 

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राम जन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण का कार्य - ट्रस्ट

तकनीक और परंपरा का अनूठा संगम

मंदिर निर्माण में देश की कई विशेषज्ञ एजेंसियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आईआईटी चेन्नई, आईआईटी रुड़की, आईआईटी मुंबई, इसरो, इंडिया इंजीनियर्स लिमिटेड के विशेषज्ञों से लेकर टाटा और एलएंडटी जैसी अग्रणी निर्माण कंपनियों की मंदिर निर्माण में सहभागिता रही। तकनीकी दलों ने मंदिर को भूकंपरोधी बनाने, दीर्घायु सुनिश्चित करने और शिल्प की मौलिकता बनाए रखने में सहयोग दिया।
 
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राम मंदिर परिसर का दृश्य

तकनीकी विशेषताएं और निर्माण शैली

मंदिर नागर शैली में बना है, जो प्राचीन भारतीय वास्तुकला की उत्कृष्ट मिसाल है। इसका निर्माण बिना लोहे और स्टील के किया गया है, ताकि संरचना की आयु लंबी रहे। मंदिर की कुल लंबाई 360 फीट, चौड़ाई 235 फीट और ऊंचाई 161 फीट है। इसमें पांच मंडप, तीन तल, और 392 खंभे हैं। प्रत्येक खंभे पर देव प्रतिमाओं की नक्काशी की गई है।
 
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अयोध्या का राम मंदिर। - फोटो : amar ujala

राम मंदिर निर्माण के प्रमुख पड़ाव

  • 09 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर के हक में फैसला
  • 25 मार्च 2020 की सुबह टेंट से अस्थायी मंदिर में विराजे रामलला
  • 05 अगस्त 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों भूमि पूजन
  • 22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा
  • 14 अप्रैल 2025 को मुख्य शिखर पर कलश की स्थापना
  • 05 जून 2025 को प्रथम तल पर राम दरबार की स्थापना
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राम मंदिर का दृश्य और दर्शन को जाते श्रद्धालु- ट्रस्ट

प्रमुख विशेषताएं

  • मंदिर की लंबाई (पूर्व से पश्चिम) 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट तथा ऊंचाई 161 फीट है।
  • मंदिर में कुल 392 खंभे व 44 द्वार हैं। 
  • मंदिर में पांच मंडप: नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप व कीर्तन मंडप।
  • खंभों व दीवारों में देवी-देवता तथा वीरांगनाओं की मूर्तियां उकेरी जा रही हैं।
  • मंदिर के चारों ओर चारों ओर आयताकार परकोटा  चारों दिशाओं में इसकी कुल लंबाई 732 मीटर तथा चौड़ाई 14 फीट है।
  • परकोटा के चारों कोनों पर सूर्यदेव, मां भगवती, गणपति व भगवान शिव को समर्पित चार मंदिरों का निर्माण हुआ है। उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा, व दक्षिणी भुजा में हनुमान जी का मंदिर है।
  • मंदिर के समीप पौराणिक काल का सीताकूप विद्यमान है।
  • सप्तमंडपम- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी व ऋषिपत्नी देवी अहिल्या को समर्पित है।
  • दक्षिण पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर टीला पर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है एवं तथा वहां जटायु प्रतिमा की स्थापना की गई है।
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