सीएए के विरोध में प्रदर्शन करते लोग
- फोटो : Prayagraj
खुल्दाबाद के रोशनबाग स्थित मंसूल अली पार्क में दोपहर तीन बजे के करीब मुस्लिम महिलाओं का जुटना शुरू हुआ। साढ़े तीन बजते-बजते यहां 100 से ज्यादा महिलाएं जमा हो चुकी थीं। यह खुल्दाबाद के अटाला, रोशनबाग, शाहगंज के दायरा, करेली के नुरुल्लारोड, गौसनगर, कोतवाली के नखासकोहना समेत अलग-अलग क्षेत्रों से आई थीं। इनके हाथों में बैनर व पोस्टर थे, जिन पर सीएए के विरोध में नारे लिखे थे।
कुछ देर बाद महिलाओं ने पार्क में ही बैठकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि सीएए से सिर्फ देश में वैमनस्यता फैलेगी। ऐसे में सरकार को इस कानून का फौरन वापस लेना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल तरन्नुम खान ने कहा कि सीएए काला कानून है। इतना काफी है कि हम हिंदुस्तानी हैं और हमें किसी को अपनी वतनपरस्ती का प्रमाण देने की जरूरत नहीं। इसी तरह सारा अहमद ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार एनआरसी के माध्यम से मुस्लिमों का उत्पीड़न कर रही है। इसी तरह की बातें अन्य महिलाओं ने भी कहीं। महिलाओं के धरना प्रदर्शन करने की सूचना पर बड़ी संख्या में वहां मुस्लिम समुदाय के पुरुषों का भी जमावड़ा हो गया।
छोटे बच्चे भी थे मौजूद
इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि महिलाओं के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी थे। 10-12 साल के कई बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर, बस यही एक नारा है, हिंदुस्तान हमारा है, के नारे लगाते नजर आए। धरना प्रदर्शन में शामिल कई महिलाएं अपनी गोद में दुधमुंहे बच्चों को भी लिए हुए थीं। पूछने पर उनहोंने जवाब दिया कि हिंदुस्तान को बांटने का विरोध इस वक्त नहीं किया गया तो आगे सबकुछ हाथ से निकल जाएगा।