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UP Election 2022: प्रयागराज में कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर, इन सीटों पर कांटे की टक्कर

Wed, 02 Mar 2022 08:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मतदान प्रतिशत के भी अपने-अपने तरीके से निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं। ऐसे में शहर दक्षिणी से भाजपा उम्मीदवार नंद गोपाल गुप्ता नंदी, पश्चिमी के सिद्धार्थनाथ सिंह के लिए चुनाव कठिन माना जा रहा है। इनके अलावा करछना से सपा के उज्जावल रमण सिंह को भी कड़ी टक्कर मिल रही है। 
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Prayagraj News : शहरी क्षेत्र में मतदान के लिए लगी लंबी कतार। - फोटो : प्रयागराज
विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में रविवार को मतदाताओं ने कई दिग्गज नेताओं का भविष्य ईवीएम में बंद कर दिया। इस बार भी मतदान प्रतिशत करीब पिछली बार जैसा है लेकिन शहर की तीनों सीट पर आमने-सामने की लड़ाई है।



मतदान प्रतिशत के भी अपने-अपने तरीके से निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं। ऐसे में शहर दक्षिणी से भाजपा उम्मीदवार नंद गोपाल गुप्ता नंदी, पश्चिमी के सिद्धार्थनाथ सिंह के लिए चुनाव कठिन माना जा रहा है। इनके अलावा करछना से सपा के उज्जावल रमण सिंह को भी कड़ी टक्कर मिल रही है। 
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Prayagraj News : शहरी क्षेत्र में मतदान के लिए लगी लंबी कतार। - फोटो : प्रयागराज
शहर दक्षिणी में 2017 के विधानसभा चुनाव में शहर दक्षिणी में 45.16 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2012 में भी 45.05 फीसदी मतदान हुआ था। इस बार भी 45 फीसदी मतदान का आंकड़ा पार हो गया है। इसके विपरीत चुनाव के नतीजों को देखें तो 2017 में भाजपा के नंद गोपाल गुप्ता नंदी विजयी हुए थे, वहीं 2012 में सपा के परवेज अहमद विधायक चुने गए थे।
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Prayagraj News : शहर उत्तरी विधायक हर्षवर्धन ने डाला वोट। - फोटो : प्रयागराज
इस बार भी नंदी का सीधा मुकाबला सपा के रईस चंद्र शुक्ला से दिखा। कमोवेश यही स्थिति पश्चिमी भी दिखाई दी। पश्चिमी में भी पिछली बार की तरह करीब 47 प्रतिशत मतदान हुआ है। पिछले चुनाव में बसपा की पूजा पाल त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया था लेकिन इस बार सिद्धार्थनाथ सिंह और ऋचा सिंह के बीच सीधी लड़ाई है।

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Prayagraj News : पोलिंग बूथ पर मतदान के लिए कतार में खड़ीं महिलाएं। - फोटो : प्रयागराज
करछना में विधायक उज्जवल रमण सिंह सपा से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में उज्जवल के चुनाव को उनके पिता सपा के वरिष्ठ नेता रेवती रमण सिंह की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। उनका भी सीधा मुकाबला भाजपा के पीयूष रंजन निषाद से दिखा।
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Prayagraj News : ईवीएम। - फोटो : प्रयागराज
देर रात तक स्ट्रांग रूम में पहुंची ईवीएम
प्रयागराज। मतदान के बाद ईवीएम मुंडेरा मंडी परिसर स्थित स्ट्रांग रूम में रखी गई। रात में आठ बजे से ही ईवीएम पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था। यह क्रम देर रात तक जारी रहा। ईवीएम भारी सुरक्षा के बीच पहुंचाई गई। स्ट्रांग रूम के आसपास का इलाका भी छावनी में तब्दील कर दिया गया है।a
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Prayagraj News : मतदान के लिए कतार में खड़ीं महिलाएं। - फोटो : प्रयागराज
बीएलओ ने सपा नेता की फोटो युक्त स्लिप संग बांटी पर्ची
शहर पश्चिमी विधानसभा में बीएलओ के खिलाफ सपा प्रत्याशी ऋचा सिंह की फोटोयुक्त स्लिप के साथ मतदान पर्ची बांटने की शिकायत हुई है। पीपलगांव में इस इस तरह का मामला सामने आया है।



डीएम संजय कुमार खत्री का कहना है कि इस तरह की शिकायत मिली है। मतदान केंद्र पर पहुंचे अफसरों ने शिकायत दूर की। देर शाम बीएलओ को वहां से हटा दिया गया और शिकायत की जांच भी कराई जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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Prayagraj News : प्रतापपुर से अपना दल एस प्रत्याशी राकेशधर त्रिपाठी। - फोटो : प्रयागराज
प्रतापपुर विधानसभा सीट : सपा और अद एस के बीच अधिकतर बूथों पर मुकाबला

प्रतापपुर विधानसभा सीट पर सपा, भाजपा गठबंधन (अपना दस एस) के साथ ही बसपा और कांग्रेस मुख्य रूप से मैदान में हैं। यहां किसी भी दल के लिए लड़ाई आसान नहीं मानी जा रही है। पिछली बार बसपा के मुज्तबा सिद्दकी ने अपना परचम लहराया था। मतदान के दिन कई जगहों पर सपा और अपना दल एस के बीच सीधी लड़ाई दिखी।


सपा प्रत्याशी विजमा यादव को परंपरागत वोटों का लाभ मिलता दिखा। अपना दल (एस) से उतरे पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी भी कई इलाकों में भारी दिखे। कुछ बूथों पर कांग्रेस भी असर दिखाती दिखी। वहीं बसपा ने भी मुकाबले को रोचक बना दिया है।



प्रतापपुर विधानसभा सीट में कुल 403 बूथों पर वोट डाले गए। हर बूथों पर मतदाताओं का अलग-अलग रुझान नजर आया। जैसे- छतौना स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय और इंग्लिस मीडियम स्कूल प्रतापपुर, ग्राप पंचायत खुर्द प्राथमिक विद्यालय के बूथों पर सपा का अधिक दबदबा दिखा। इसके पीछे मुख्य वजह स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह इलाका यादव बहुल है और सपा को कुछ फीसदी वोट पिछड़े और अनुसूचित जातियों के मिलते नजर आए।



इसके साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय वाले इलाके सराय ममरेज, मियां का पूरामें भी साइकिल मजबूत दिखी। अद एस को सवर्ण वोटों का लाभ मिलता नजर आया। इसके अलावा पिछड़ों वर्ग में अद की पैठ दिखी। कांग्रेस के संजय तिवारी और बीएसपी के घनश्याम पांडेय ने ब्राह्मण वोटों में जरूर सेंधमारी की है। मतदान के बाद किसी भी दल एकतरफा जीत मिलती नहीं दिखती।\

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Prayagraj News : मतदान के लिए कतार में खड़े लोग। - फोटो : प्रयागराज
बारा में सीधी लड़ाई को बसपा ने बनाया त्रिकोणीय 

जिले में यमुनापार की बारा सुरक्षित विधानसभा सीट पर इस बार दिलचस्प लड़ाई है। कुछ बूथों पर सीधी टक्कर तो कुछ पर त्रिकोणीय लड़ाई देखने को मिली। यहां साइकिल, हाथी के साथ कप-प्लेट के बीच जबरदस्त मुकाबला है।



कुछ इलाकों में हाथ का पंजा भी संघर्ष में रहा। हालांकि, भाजपा का कॉडर वोट चुनाव चिह्न कमल का फूल ईवीएम में न दिखने से भ्रमित से नजर आए। ऐसे में लोगों ने प्रत्याशियों के व्यक्तिगत चरित्र और व्यवहार पर वोटिंग किया। इस लिहाज से इस सीट पर किस पार्टी का पलड़ा भारी रहा, तस्वीर मतगणना के बाद ही साफ होगी।  



बारा विधानसभा में शंकरगढ़, नारीबारी-जारी, अमलियां, पंडुवा, नौढ़ियाकला आदि पोलिंग बूथों पर भाजपा-अपना दल गठबंधन के प्रत्याशी वाचस्पति और सपा प्रत्याशी अजय भारती मुन्ना के बीच सीधी टक्कर रही। यहां बसपा प्रत्याशी डॉ. अजय कुमार भी मजबूती से लड़ते नजर आए। सपा प्रत्याशी अजय भारती के साथ जहां लोगों पिछले चुनाव में हार की सहानुभूति रही।




साथ ही लगातार क्षेत्र में जनता के बीच रहना फायदेमंद रहा। वहीं बसपा प्रत्याशी डॉ. अजय कुमार को दो बार से इलाके का विधायक होने का फायदा मिला। भले ही हर बार उनका चुनाव निशान बदलता गया। अजय भारती को सपा के कॉडर वोट के साथ अन्य बिरादरी के मत भी मिले हैं। वहीं बसपा प्रत्याशी को कॉडर वोट के  साथ दो बार से इलाके का विधायक होने और इलाके के लोगों से व्यक्तिगत संबंध का भी लाभ मिला है। वहीं अपना दल प्रत्याशी वाचस्पति को पटेल बिरादरी के तो मत मिले ही साथ ही भाजपा गठबंधन का भी फायदा मिला है।




तमाम जगहों पर मतदान कर बाहर निकली महिलाएं कमल का फूल चुनाव निशान ईवीएम में न होने से भ्रमित रहीं। ब्राह्मण बाहुल्य लालापुर, नौढ़िया तरहार, बसना, असवां आदि इलाकों में मतों का बिखराव लड़ाई को दिलचस्प बना रहा है। लोग गठबंधन प्रत्याशी के बजाय स्थानीय प्रत्याशी के साथ नजर आए। लेकिन अधिकतर भाजपा-अपनादल गठबंधन प्रत्याशी के साथ रहे। वहीं हाथ का पंजा भी कुछ बूथों पर मजबूती से लड़ाई में रहा।



कांग्रेस प्रत्याशी मंजू संत का इलाके में लगातार सक्रिय रहना और व्यक्तिगत व्यवहार का लाभ मिला। कुल मिलाकर इस सीट पर साइकिल और कप-प्लेट की लड़ाई को हाथी ने त्रिकोणीय बना दिया है। अंतिम बाजी किसके हाथ लगेगी। यह 10 मार्च को मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा। 

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prayagraj news : नीलम करवरिया। - फोटो : prayagraj
मेजा : भूमिहार और ठाकुर आखिरी क्षण में हुए निर्णायक

मेजा विधानसभा क्षेत्र में भूमिहार और ठाकुर बिरादरी के वोट आखिरी क्षणों में निर्णायक हो गए। मुकाबला भाजपा और सपा में सीधा है। बसपा और कांग्रेस ने ब्राह्मण मतों में सेंध जरूर लगाई लेकिन उससे किसी को नुकसान होगा इसकी उम्मीद कम ही दिखती है। भूमिहार और ठाकुर बिरादरी के मत एक हो जाने की वजह से तस्वीर साफ होती दिख रही है।


मेजा विधानसभा में पिछले चुनावों तक सपा के खेवनहार रहे ठाकुर और भूमिहार मतदाता इस बार भाजपा प्रत्याशी नीलम करवरिया के साथ खड़े नजर आए। ठाकुर और भूमिहार मतदाताओं के कटने के बाद अन्य कई जाति के मतदाताओं का सपा प्रत्याशी संदीप पटेल के प्रति भी झुकाव रहा है। बसपा प्रत्याशी बाबा तिवारी और कांग्रेस की शिवानी द्विवेदी ने ब्राह्मण मतों में सेंध जरूर लगाई लेकिन इसका कितना असर परिणाम पर होगा यह तो 10 मार्च को ही पता चलेगा। 


भाजपा के प्रत्याशी के रूप में नीलम करवरिया ने 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी रामसेवक पटेल को 19 हजार मतों से पराजित किया था। इस पांच वर्ष के कार्यकाल में नीलम करवरिया ने विरोधियों को भी साध लिया, इसलिए नाराजगी न के बराबर रही।



अंदरखाने यह भी चर्चा है कि सपा के एक बड़े नेता के इशारे पर ठाकुर और भूमिहार बिरादरी के मतदाताओं ने भाजपा का दामन थामा। कहा जा रहा है कि सपा मुखिया अखिलेश ने इस सीट पर उनके मन के मुताबिक प्रत्याशी नहीं उतारा, जिससे यह नए समीकरण बने। 2017 के विधानसभा चुनाव में नीलम करवरिया को 67807 वोट मिले थे, वहीं रामसेवक पटेल को 47964 मत मिले थे। इस प्रकार 19843 मतों का अंतर था। इस बार मतों की स्थिति क्या होगी यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।

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Prayagraj News : पूर्व विधायक प्रशांत सिंह राहुल। - फोटो : प्रयागराज
हंडिया में धुरंधरों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला

हंडिया विधान सभा सीट पर इस बार त्रिकोंणीय मुकाबला है। इस सीट पर भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी से पहली बार मैदान में उतरे पूर्व विधायक प्रशांत सिंह और मौजूदा विधायक हाकिम लाल बिंद में सीधी टक्कर है।


हंडिया विधानसभा से समाजवादी पार्टी से बागी हुए पूर्व विधायक प्रशांत सिंह इस बार भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी से किस्मत आजमा रहे हैं। प्रशांत सिंह के पिता महेश नारायण समाजवादी पार्टी से 2012 में हंडिया विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए थे। पिता के निधन के बाद 2013 में हुए उपचुनाव में प्रशांत ने इस सीट से जीत दर्ज की थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने प्रशांत सिंह का टिकट काटकर वासुदेव यादव की बेटी निधि यादव को प्रत्याशी बना दिया था।



इसके बाद से ही प्रशांत की नाराजगी शुरू हो गई थी। इस बार सपा ने बसपा छोड़कर आए विधायक हाकिमलाल बिंद को हंडिया से उम्मीदवार घोषित किया, तो प्रशांत बागी हो गए। सपा से टिकट कटने के बाद प्रशांत भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी से मैदान में उतरे हैं। जबकि, बसपा से नागेंद्र कुमार त्रिपाठी उर्फ मुन्ना त्रिपाठी ने इस सीट पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। 3,95,530 मतदाताओं वाली इस सीट पर रविवार को मतदान के शुरुआती दौर में अधिकांश बूथों पर मतदाताओं की बहुत ही कम मौजूदगी रही।



दोपहर बाद मतदान केंद्रों पर महिला पुरुष मतदाताओं का जमावड़ा लग गया। हंडिया विधानसभा क्षेत्र में 213 मतदान केंद्र और 438 बूथ है। सुबह सात बजे तक यहां 7.38 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि, दिन के 11 बजे तक 15.92 प्रतिशत मतदाम रिकार्ड किया गया। इसी तरह दोपहर एक बजे तक28.72 प्रतिशत और देर शाम तक 52 प्रतिशत मतदान रिकार्ड किया गया।



इस सीट पर बसपा और सपा का पहले से ही प्रभाव रहा है। बिंद समुदाय के मतदाता भी अधिक संख्या में होने की वजह से यह जीत के समीकरण में उनकी भी अहम भूमिका मानी जाती रही है। इस बार सपा से हाकिम लाल बिंद और निषाद पार्टी से प्रशांत सिंह और बसपा से नागेंद्र कुमार त्रिपाठी के आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
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Prayagraj News : मतदान करने के बाद निशान दिखातीं मुस्लिम महिलाएं। - फोटो : प्रयागराज
कोरांव : मतों के बिखराव से मुकाबला हुआ चतुष्कोणीय

कोरांव विधानसभा क्षेत्र में मतों के बिखराव से मुकाबला चतुष्कोणीय दिखाई दिया। भाजपा द्वारा ऐन वक्त पर प्रत्याशी बदले जाने को लेकर मतदाताओं में नाराजगी रही। उधर सपा, बसपा भी मजबूती के साथ मैदान में डटी रहीं, वहीं राहुल गांधी के जनसभा करने के कारण कांग्रेस भी जीत के प्रति आशान्वित नजर आई।



भाजपा ने यहां पहले आरती कोल को चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन नामांकन से पहले पार्टी ने उनका टिकट काटते हुए राजमणि कोल को प्रत्याशी बना दिया। प्रत्याशी बदले जाने से कुछ मतदाताओं ने नाराजगी का इजहार किया। गोपाल इंटर कॉलेज मतदान केंद्र पर वोट डालने पहुंचीं द्रौपदी देवी और रामबाबू सोनी ने कहा कि अगर भाजपा ने प्रत्याशी न बदला होता तो एकतरफा मुकाबला होता।



स्थानीय पार्षद अजय केसरी, व्यापारी संदीप केसरी की मानें तो लोगों ने मोदी और योगी के नाम पर भाजपा को वोट दिया। वहीं दूसरी ओर आरती कोल भी मैदान में शिवसेना से प्रत्याशी हैं। इस वजह से वोटों के बिखरने का अंदेशा है। इस सीट पर सपा से रामदेव कोल, कांग्रेस से पूर्व विधायक रामकृपाल और बसपा से पूर्व विधायक राजबलि जैसल भी पूरी मजबूती से मैदान में डटे रहे।



सपा के पक्ष में अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने माहौल बनाया तो कोरांव में राहुल गांधी के आने से कांग्र्र्रेस प्रत्याशी को भी संजीवनी मिल गई। स्थानीय मतदाताओं की मानें तो राहुल गांधी की जनसभा के बाद कांग्रेस को नई ऊर्जा मिली जो मतदान तक कायम रही। बदले समीकरणों के कारण कोरांव सीट पर राजनीतिक पंडित हार-जीत को लेकर उलझे रहे।
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