सदाकत गाजीपुर के दिलदारनगर का रहने वाला है। उसने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की, छात्रसंघ उपाध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा। उसने मुस्लिम बोर्डिंग हॉस्टल के कमरा नंबर 36 को अवैध ठिकाना बना रखा था। यहीं गुलाम, गुड्डू मुस्लिम से लेकर अतीक-अशरफ के तमाम करीबी मिलने आते थे।
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सदाकत खां और अली अहमद। फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला।
उमेश पाल हत्याकांड में जिस सदाकत खान के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है, उसकी दबंगई के चर्चे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आम हैं। शूटर गुलाम के जरिए वह अतीक के दूसरे नंबर के बेटे अली के संपर्क में आया और फिर उसका नाम लेकर दबंगई करने लगा।
सदाकत गाजीपुर के दिलदारनगर का रहने वाला है। उसने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की, छात्रसंघ उपाध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा। उसने मुस्लिम बोर्डिंग हॉस्टल के कमरा नंबर 36 को अवैध ठिकाना बना रखा था। यहीं गुलाम, गुड्डू मुस्लिम से लेकर अतीक-अशरफ के तमाम करीबी मिलने आते थे।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव के दौरान गुलाम अली को लेकर मुस्लिम बोर्डिंग हॉस्टल में भी प्रचार करने पहुंचा था। यहीं उसने अली को सदाकत से मिलवाया था। छात्रसंघ चुनाव में सक्रिय होने के कारण सदाकत काफी मुखर वक्ता था। यही बात अली को भा गई। इसके बाद वह साये की तरह अली के साथ रहने लगा था। उसके साथ चुनाव प्रचार के लिए मेरठ समेत अन्य शहरों में भी गया था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सदाकत की अतीक के बेटे अली व अन्य माफिया से जान पहचान थी। मंत्री नंद गोपाल गुप्ता पर आरडीएक्स हमले का आरोपी माफिया दिलीप मिश्रा भी उसका करीबी था।
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सदाकत खान। फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
व्हाट्सएप चैट, सीसीटीवी फुटेज को बनाया आधार
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चार्जशीट का मूल आधार सदाकत के मोबाइल से मिले व्हाट्सएप चैट व बरेली जेल के सीसीटीवी फुटेज बनाए गए हैं। दरअसल, सदाकत के मोबाइल फोन से पुलिस को कुछ ऐसे व्हाट्सएप चैट मिले थे, जो हत्याकांड की साजिश में उसकी संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं। इसके साथ ही बरेली जेल के उस सीसीटीवी फुटेज को भी आधार बनाया गया है, जिसमें वह हत्याकांड को अंजाम देने वाले शूटरों असद, गुलाम व अन्य के साथ अशरफ से मिलने जाता दिखाई दे रहा है। अशरफ से मुलाकात के दौरान उसके फोन की लोकेशन भी चार्जशीट का हिस्सा बनाई गई है। सदाकत को हत्याकांड में साजिशकर्ता माना गया है।
पांच के खिलाफ भी चार्जशीट जल्द
सूत्रों का कहना है कि जेल में बंद अतीक के नौकर राकेश उर्फ लाला, ड्राइवर कैश अहमद, अतीक के गुर्गों अरशद कटरा, नियाज अहमद व मोहम्मद सजद के खिलाफ भी पुलिस ने अहम साक्ष्य जुटा लिए हैं। इसमें उनके मोबाइल फोन, उनकी निशानदेही पर बरामद नकदी व असलहे भी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि उन्होंने ही घटना के बाद शाइस्ता के कहने पर असलहे व नकदी अतीक के चकिया स्थित कार्यालय पर जाकर छिपाए थे। इनमें से तीन ने हत्या वाले दिन अशरफ व असद को फोन करके उमेश की लोकेशन भी दी थी।
इलाहाबाद विवि का मुस्लिम हॉस्टल जहां रहता था उमेश पाल हत्याकांड का आरोपी सदाकत खान।
- फोटो : अमर उजाला।
एससी-एसटी एक्ट की बढ़ाई थीं धाराएं
उमेश की पत्नी जया पाल की ओर से धूमनगंज में पहले हत्या, आपराधिक षड्यंत्र समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया गया था। बाद में उनकी ओर से अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करते हुए मामले में एससी-एसटी एक्ट की धाराएं बढ़ाने के लिए धूमनगंज थाने में प्रार्थनापत्र दिया गया था। सत्यापन के बाद पुलिस ने मुकदमे में 23 मई को एससी-एसटी एक्ट की धाराएं बढ़ा दीं। दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी को ही देने की बाध्यता के कारण इसकी विवेचना एसीपी धूमनगंज महेंद्र सिंह देव को स्थानांतरित कर दी गई। 24 मई को विवेचना ग्रहण करने के दो दिन बाद एसीपी ने सदाकत के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।