उमेश पाल की हत्या का अंतिम खाका अशरफ की अगुवाई में बरेली जेल में 11 फरवरी को खींचा गया। असद, गुलाम, गुड्डू मुस्लिम और विजय चौधरी उर्फ उस्मान समेत अन्य गुर्गे जेल में मीटिंग के बाद 12 फरवरी को वापस आए। शूटरों ने उमेश की हत्या की पहली कोशिश 15 फरवरी और दूसरा प्रयास 21 फरवरी को किया था, लेकिन सफल नहीं हो पाए। 24 फरवरी को उन्होंने उमेश को उनके घर पर गोलियों से छलनी कर दिया। दो सिपाही भी घटना में मारे गए।
अतीक का बेटा असद, उमेश पाल की हत्या के लिए उतावला था। यूं तो उमेश की हत्या के लिए महीनों से प्लानिंग चल रही थी। दो महीनों से रेकी भी कराई जा रही थी, लेकिन अतीक के गुर्गों को कामयाबी नहीं मिल पा रही थी। इसके बाद असद ने अपने हाथ में कमान ली। उसी ने सब कुछ मैनेज करना शुरू किया। वह अतीक और अशरफ से लगातार संपर्क में रहा। सदाकत, गुलाम और गुड्डू मुस्लिम हर कदम पर उसके साथ खड़े थे।