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कुंभ मेला 2019: संक्रांति पर 'षटतिला दान' होता है फलदायी, कुंभ स्नान के बाद इसका ये है महत्व

Tue, 15 Jan 2019 04:32 AM IST
vivek shukla मुनेंद्र बाजपेयी, अमर उजाला, प्रयागराज
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ganga snan - फोटो : अमर उजाला
मकर संक्रांति पर तिल का षटतिला दान फलदायी है। वहीं तिल का विभिन्न रूप में सेवन करना शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है। तीर्थ पुरोहितों, ज्योतिषियों और आयुर्वेदचार्य इन तथ्यों को अपने-अपने तरीके से प्रमाणित करते हैं। 

 
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Til
संगम तट पर स्नान के बाद मकर संक्रांति पर तिल और खिचड़ी दान करने की परंपरा है। स्नान-दान के बाद स्नानार्थी तिलकुट और खिचड़ी का सेवन करते हैं। तीर्थ पुरोहित राजेंद्र पालीवाल के मुताबिक काले तिल का दान फलदायी होता है। यह दान क्रूर ग्रहों के प्रभाव को कम करता है। खिचड़ी के बाद तिल या तिलकुट का सेवन शरीर और हाजमे के लिए रामबाण औषधि है।
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sun
ज्योतिषाचार्य डॉ. राकेश शुक्ला के मुताबिक सूर्य का मकर राशि में प्रवेश अध्यात्म, खगोल विज्ञान और ज्योतिषी शास्त्र स्तर पर अतिविशिष्ट पर्व माना जाता है। सूर्य आध्यात्मिक, आत्मोन्नति करने वाले ग्रह हैं। सौर्य मंडल सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करता है। इन्हीं कारणों से मकर संक्रांति के दिन स्नान, ध्यान, पूजन के बाद दान का महत्व है। पवित्र नदियों में खासकर संगम स्नान के बाद तिल और सीधा में खिचड़ी का दान फलदायी माना गया है। इससे सूर्य ग्रह को बल मिलता है।

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Til
आयुर्वेंद शास्त्र में तिल और गुड़ का सेवन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला माना गया है। चरक संहिता में इसका उल्लेख है। आयुर्वेदाचार्य डॉ. आशुतोष मालवीय के मुताबिक शीत ऋतु में तिल, गुड़ और गाजर का सेवन अत्यंत लाभकारी है।  तीनों का अलग-अलग महत्व है। ये सभी प्राकृतिक वस्तुएं शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की रामबाण औषधि हैं।
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til k ladoo
खगोलविद् डॉ. मालवीय बताते हैं कि काला तिल सर्वोत्तम माना गया है। ठंड के सीजन में उत्तम स्वास्थ्य के लिए तिल, गुड़ और गाजर को किसी भी रूप में ग्रहण करना काफी गुणकारी है। तिल और गुड़ से बनी वस्तुएं शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा देने वाली हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन और फोलिट मिलता है। गुड़ का काढ़ा पीने से  जोड़ और अस्थमा की परेशानी से राहत मिलती है। 

 
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