कोई लड्डू बांट रहा था तो कोई पूड़ी-हलवा। ना पड़ा। घाटों पर स्नान का सिलसिला भोर से ही शुरू हो गया था। संगम नोज के अलावा महावीर घाट, अक्षयवट घाट, राम घाट, नाग वासुकि, शिवकुटी और फाफामऊ में स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। बड़ी तादाद में महिलाओं, पुरुषों, बच्चों का रेला घाटों पर उमड़ता रहा। संगम स्नान के बाद लोगों ने तिल, चावल, गुड़ और उड़द की दाल का दान किया। कोई अन्न दान कर रहा था तो कोई वस्त्र।