काटजू रोड स्थित अब्दुला मस्जिद के मुसाफिरखाने और आसपास के इलाके को सिनेटाइज करते नगर निगम के कर्मचारी।
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बड़ी बात यह है कि जिस दिन यह जनता कर्फ्यू लागू था, उसी दिन दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात के जलसे में शामिल सात विदेशी नागरिकों समेत नौ लोग शहर पहुंचे, लेकिन पुलिस या प्रशासन के किसी नुमाइंदे को इसकी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं, यहां पहुंचने के बाद वह बाकायदा शहर के व्यस्ततम इलाकों में शुमार शाहगंज क्षेत्र के काटजू रोड स्थित मुसाफिरखाने में लगातार नौ दिन रहे, लेकिन न ही पुलिस और न ही स्थानीय खुफिया तंत्रों को इसकी जानकारी हो सकी।
जानकारों का कहना है कि हाई अलर्ट के इस माहौल में बाहर से आकर लगातार नौ दिनों तक बिना किसी को सूचना दिए विदेशी नागरिकों के शहर में रहने की घटना कहीं न कहीं पुलिस के साथ ही खुफिया एजेंसी कर्मियों की नाकामी को भी साबित करता है।