soraon murder case
- फोटो : प्रयागराज
दरअसल परिवार के बुजुर्गों का कहना था कि गांव में शव लेकर जाने पर स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है। ऐसे में अंतिम संस्कार रसूलाबाद घाट पर करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद एक साथ उठीं पांच अर्थियाें को देख लोगों के कलेजे कांप गए। करीब दो बजे मोनू व अन्य परिजन पांचों शव लेकर रसूलाबाद घाट पर पहुंचे। यहां दोनों मासूमों के शवों को फाफामऊ कछार में गंगा के बीच बने टापू पर दफनाया गया। जबकि विजयशंकर, सोनू व कामिनी के शवों का दाह संस्कार किया गया। शवों को मुखाग्नि मोनू ने दी। इस दौरान भी उसकी आंखों से आंसू लगातार बहते रहे। घाट पर मृतक कामिनी के भाई कार्तिकेय, पिता सुधाकर समेत मायकेपक्ष के अन्य लोग भी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में विजयशंकर के परिवार के भी लोग पहुंचे थे।