देवी-देवताओं लिबास में मेला क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बने बच्चे।
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ओल्डजीटी, गंगोली शिवाला और त्रिवेणी पुलों को जोड़े जाने के बाद पैदल आवागमन तो शुरू हो गया है, लेकिन अभी काम बाकी है। सड़कों पर बालू डाल कर छोड़ दिया गया है। चकर्ड प्लेट बिछाने का काम बड़े हिस्से में बाकी रह गया है। सबसे अधिक दिक्कत पेयजल को लेकर हो रही है। जल निगम की ओर से पेयजल की पाइप लाइनें अभी नहीं डाली जा सकी हैं। ऐसे में शिविर लगाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। दंडीबाड़ा के अलावा अन्य सेक्टरों में पानी की आपूर्ति के लिए फिलहाल टैंकर लगाने पड़े हैं।
हनुमानजी का वेश धारण कर माघ मेले में भ्रमण करते कलाकार।
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- पंडाल-टेंट सुविधाओं में कटौती, संत नाराज
माघ मेले में यह पहला मौका है जब मंच और पंडाल सुविधाएं संतों-भक्तों को नहीं दी जा रही हैं। कोविड-19 के संक्रमण की वजह से पंडाल और मंच लगाने की मनाही कर दी गई है। ऐसे में संतों की चिंता है कि उनके भक्त आएंगे तो बैठेंगे कहां। कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमण की वजह से मेले में किसी जगह भीड़ न लगने देने की गाइड लाइन की वजह से इस बार मंच और पंडाल की सुविधा रोक दी गई है। इससे संतों में नाराजगी है।