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तस्वीरें: भव्य ही नहीं, निराली भी रही निरंजनी की पेशवाई, श्रद्धालुओं संग रथों पर विराजे महामंडलेश्वर

Wed, 02 Jan 2019 11:35 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Peshwai Niranjani
पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की निराली पेशवाई से बुधवार को संगम की रेती पर सजी। मठ बाघंबरी गद्दी से लेकर संगम क्षेत्र स्थित अखाड़े की छावनी तक नागा संन्यासियों, महामंडलेश्वरों, संतों-श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा। दर्शन देतीं और प्रदर्शन करतीं नागा संन्यासियों की टोलियों के साथ फूलों से सजे महामंडलेश्वरों के रथों संग तरह-तरह की चौकियां और काशी से आई बाबा विश्वनाथ के साधकों की ‘डमरू टोली’ सभी के आकर्षण का केंद्र रही। जगह-जगह संतों का ऐसा स्वागत हुआ कि मठ बाघंबरी गद्दी से अखाड़े की छावनी तक पहुंचने में निरंजनी की पेशवाई को तकरीबन सात घंटे लग गए। निरंजनी अखाड़े की निकली पेशवाई, नागा संन्यासी बने आकर्षण का केंद्र, अभिनेता आशुतोष राणा हुए शामिल
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हाथी, घोड़ों, ऊंट, अखाड़े की ध्वजाओं, तरह-तरह की पताकाओं, अखाड़े के देवता भगवान कार्तिकेय की फूलों से सजी हुई पालकी, नागा संन्यासियों के कंधे पर रखे भाले, निशान सूर्यप्रकाश, चंद्रप्रकाश, निशान वाले पंखों के साथ अखाड़े की पेशवाई बाघंबरी गद्दी से आरंभ हुई।
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और अष्टकौशल महंत नरेंद्र गिरि, महंत रवींद्र पुरी, महंत आशीष गिरि आदि की देखरेख में पेशवाई पुरानी जीटी रोड, दारागंज थाने के सामने से भारतीय स्टेट बैंक, मीरागली, मोरी पंपिंग स्टेशन से नीचे उतरकर, त्रिवेणी उत्तरी पांटून पुल से होकर अखाड़े की छावनी पहुंचकर पूरी हुई।

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निरंजनी की पेेशवाई का नजारा ऐसा निराला रहा कि उसे देखने के लिए पूरे रास्ते खासकर अल्लापुर और दारागंज में सड़क के दोनों ओर लोग खड़े रहे तो मकानों की छतों, बारजों पर जमा बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों की आंखें संतों को निहारती रहीं। श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन किए और उन पर फूल बरसाए।
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छतों, बारजों, सड़क के किनारे या फिर डिवाइडर पर खड़े होकर मोबाइल से जुलूस की तस्वीरें बनाईं तो कई संतों के साथ सेल्फी भी ली। अखाड़े के पदाधिकारी, संत-महंत, साधु आदि पैदल चले। प्रत्येक दल के आगे शिष्यों की टोलियां मुग्ध और मगन होकर नाचती, गाती रहीं।
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हरिधाम सनातन सेवा ट्रस्ट के प्रमुख और आनंद पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद गिरि जी महाराज के नेतृत्व में निकली पेशवाई में निरंजनी के महामंडलेश्वरों, संतों के अतिरिक्त पंच अग्नि अखाड़े के सचिव महंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी, तपोनिधि श्री पंचायती आनंद अखाड़ा के मेला अध्यक्ष श्रीमहंत जगदीश गिरि, सचिव महंत शंकरानंद सरस्वती, महंत कालू गिरि, महंत धनराज गिरि, महंत लक्ष्मण भारती सहित कई अन्य संत, महात्मा भी शामिल हुए।
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छत्र,चंवर धारण किए हुए शिष्यों के साथ चले प्रत्येक महामंडलेश्वर के दल के आगे एक बैंडबाजा पार्टी भजन या गंगागीत गाते हुए चली।

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स्वामी आनंद गिरि ने किया स्वागत, व्यवस्था भी संभाली
निरंजनी अखाड़े के संन्यासी और बडे़ हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने पेशवाई की व्यवस्था संभाली। साथ ही पांटून पुल के पहले उन्होंने शिष्यों के साथ माल्यार्पण करके आचार्य महामंडलेश्वर और अन्य महामंडलेश्वरों का स्वागत किया।

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शहरियों, अफसरों ने किया संतों का स्वागत
पेशवाई के दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और अखाड़ेे के अष्टकौशल महंत नरेंद्र गिरि, महंत रविंद्र पुरी, महंत आशीष गिरि आदि के अतिरिक्त आचार्य महामडंलेश्वर और अन्य महामंडलेश्वरों का मोरी पंपिंग स्टेशन के करीब मंडलायुक्त आशीष गोयल, कुंभ मेला अधिकारी विजय किरण आनंद, एडीजी एसएम सावत, आईजी मोहित अग्रवाल, डीआईजी कविंद्र प्रताप सिंह आदि ने माल्यार्पण करके स्वागत किया। वहीं अल्लापुर और दारागंज में शहरियों, कारोबारियों के अतिरिक्त विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, तीर्थपुरोहित मधु चकहा, श्रवण शर्मा, अमित वैद्य, डॉ.प्रकाश मिश्रा, प्रभात पांडेय आदि ने भी महंतों, महामंडलेश्वरों का माल्यार्पण करके स्वागत किया। 

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करतब दिखाते नागाओं पर न्योछावर करके लुटाए नोट
निरंजनी की पेशवाई के दौरान तलवार, भाला, फरसा आदि के साथ शिव का भभूत लपेटे चली नागा संन्यासियों की टोलियों ने अजब,अनूठे करतब दिखाए। बालक, युवा और बुजुर्ग सभी आयुवर्ग के नागा संन्यासियों ने पहले लाठियों से प्रदर्शन किया और फिर तलवारबाजी से भी चकित किया। जुलूस को जगह-जगह रोककर नागाओं ने करतब दिखाए। इस पर महंत नरेंद्र गिरि सहित अन्य संतों ने भी नागाओं पर न्योछावर करके नोट लुटाए।

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भोले का भभूत उड़ाती रही काशी की डमरू टोली
भोले की नगरी काशी से आई युवा साधकों की टोली का डमरू नृत्य आकर्षक का केंद्र रहा। पूरे शरीर पर भोले का भभूत लपेटे युवा भोले के जयकारे लगाते रहे। जुलूस के दौरान उन्होंने अबीर-गुलाल की तरह संतों, श्रद्धालुओं पर भी जमकर भोले का भभूत उड़ाया।

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महिला महामंडलेश्वरों की टोली भी
निरंजनी की पेेशवाई में भी महिला मंडलेश्वरों ने मौजूदगी दर्ज कराई। पेशवाई में उज्जैन से महामंडलेश्वर मंदाकिनी पुरी, महामंडलेश्वर प्रेम लता गिरि, महामंडलेश्वर सती गिरि आदि शिष्यों, साध्वियों के साथ निरंजनी की पेशवाई में शामिल हुईं।

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जो महामंडलेश्वर हुए पेशवाई में शामिल
निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी महामंडलेश्वर गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी विष्णु चैतन्य तीर्थ, महामंडलेश्वर स्वामी विद्यानंद पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी हरिऊं पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी हरिओम गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी महेशानंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद, महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वरानदं सरस्वती, महामडंलेश्वर स्वामी आदित्यानंद गिरि सहित तकरीबन तीन दर्जन महामंडलेश्वर शामिल हुए।

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रास्ते भर चाय, पानी का भंडारा
पेशवाई के दौरान शहरियों का उत्साह ऐसा रहा कि उन्होंने पेशवाई में शामिल भक्तों, श्रद्धालुओं का स्वागत किया। जुलूस के दौरान सड़क किनारे के दुकानदारों, कई दलों, संस्थाओं की ओर से उनके लिए चाय, पानी का प्रबंध किया गया।

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आकर्षक रही भोले की टोली
पेशवाई के दौरान सुसज्जित रथों के अतिरिक्त मोरपंखों से सजी चौकी और शिव के गणों वाली चौकी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती रही। भोले शिव, शिव भोले गीत पर ‘शिव’ संग उनके गणों ने नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं को आनंदित किया।

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छावनी में नागाओं ने रमाई धूनी
छावनी में पहुंचते ही नागा संन्यासियों ने अपना स्थान लिया और धूनी रमाई। धूनी के इर्द-गिर्द रुद्राक्ष का शिवलिंग बनाया, तरह-तरह के त्रिशूल से घेरबंदी की। फिर धूनी की पूजा और फिर शुरू हुआ धूना-पानी।

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पांच लाख से ऊपर की ‘पुकार’
निरंजनी अखाड़े की पेशवाई जब मेला क्षेत्र स्थित निरंजनी की छावनी में पहुंची तो परंपरा के मुताबिक आचार्य और अन्य महामंडलेश्वरों ने धर्मध्वजा की पूजा परिक्रमा की। फिर गुरु महाराज के चरणों में हाजिरी लगाई और ‘पुकार’ कराके भेंट दी।
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पुकार ‘दशनाम गुरु सुनना, आचार्य महामंडलेश्वर ने गुरु महाराज के चरणों में अमुक रकम से ‘पुकार’ कराई है’ के बाद आनंद पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद गिरि जी महाराज ने पांच लाख ग्यारह हजार रुपये भेंट किए। इसी क्रम में सभी महामंडलेश्वरों ने बारी-बारी से गुरु महाराज के दरबार में हाजिरी लगाई, पुकार कराई और यथाशक्ति भेंट चढ़ाई।
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