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संगम की रेती पर दुर्लभ और कठिन तप, अग्नि के घेरे में धूना तपस्या

Fri, 31 Jan 2020 12:53 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
संगम की रेती पर मोक्ष की कामना से लाखों गृहस्थ परिवारों के कल्पवास के बीच गुरुवार को वसंत पंचमी पर साधकों-संतों ने विश्व कल्याण के लिए कठिन साधना आरंभ की। अग्नि के घेरे के बीच करीब दो सौ से अधिक संत इस धूना तपस्या में रम गए। माघ मेला बाद गंगा दशहरा पर इस तपस्या की पूर्णाहुति होगी।
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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
संगम नोज से लगे महावीर मार्ग पर गंगा पार बसे खाक चौक के त्यागी नगर में धूना तपस्या ब्रह्म मुहूर्त में शुरू हो गई।
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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
चारों तरफ अग्नि का घेरा बनाकर साधक बीच में बैठ गए। यह तपस्या नियमित सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलेगी। त्यागी नगर में दो सौ से अधिक स्थानों पर आरंभ हुई यह तपस्या अलग-अग छह रूपों में हो रही है।
 

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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
कोई सप्त अग्नि साधना कर रहा है तो कोई पंच अग्नि साधना। चौरासी अग्नि, द्वादश अग्नि, कोटि अग्नि और कोटि -खप्पर अग्नि की भी साधनाएं शुरू हुई हैं।
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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
धूना तपस्या आरंभ करने वाले महात्यागी स्वामी गोपाल दास महाराज ने बताया कि त्यागी नगर के शिविरों में विश्व कल्याण, शांति और लोक मंगल के साथ ही समाज में सुख-समृद्धि की कामना से धूना तपस्या शुरू हुई है।
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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
माघ मेले, अर्धकुंभ और महाकुंभ में यह तपस्या वसंत पंचमी से आरंभ होती है और गंगा दशहरा तक इसका क्रम चलता है।
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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
इस तपस्या के दौरान साधक संत सूर्योदय से सूर्यास्त तक अग्नि के घेरे के बीच बैठकर तप करता है। इस दौरान अन्न-जल का परित्याग कर दिया जाता है। सूर्यास्त के बाद फलाहार करने के साथ अनुष्ठान पूरा होने तक भूमि पर ही जप, तप, ध्यान की साधना होती है।
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