प्रतीकात्मक तस्वीर
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करीबी की खोपड़ी उबालकर खा ली थी
राजा कोलेंद्र ने सीओडी में काम करने वाले काली प्रसाद श्रीवास्तव को 50 हजार रुपये उधार दिया था। काली प्रसाद ने रुपये वापस नहीं किए लेकिन वह उसे अपराध कर पुलिस से बचने के अचूक नुस्खे बताता था। संयोग था कि 14 हत्याओं के बाद भी कोलेंद्र कभी पकड़ा नहीं गया। वह काली प्रसाद की बुद्धि का कायल था। हालांकि जब काली प्रसाद ने उसका पैसा नहीं लौटाया और कोलेंद्र को लगा कि वह पैसा नहीं लौटाएगा तो उसने उसका भी वही हश्र किया। वह काली प्रसाद को लेकर शंकरगढ़ गया और टंडन वन के पास गला रेतकर उसे मार डाला। उसकी खोपड़ी को वह पिगरी फार्म ले आया और उबालकर इसलिए खा लिया कि उसकी बुद्धि बहुत तेज थी और कोलेंद्र को अपनी बुद्धि भी तेज करनी थी।
पत्नी फूलन तो बेटा कलेक्टर
राजा कोलंदर खुद साइको था ही पूरे परिवार को भी मनोरोगी कर दिया था। उसकी पत्नी का नाम गोमती था। शादी के बाद उसने पत्नी का नाम बदलकर फूलन देवी रख दिया था। बेटे का नाम कलेक्टर तो दूसरे का नाम विधायक रखा था। इसी तरह वह मिलने जुलने वालों को भी कोड नाम देता था। हत्या के बाद अपने गिरोह के लोगों से वह इसी कोड में बात करता था।