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राजा कोलंदर : इंसान की शक्ल में हैवान, 14 लोगों की हत्या की थी, मानव के भेजे का पीता था सूप

Thu, 25 Mar 2021 12:55 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • राजा कोलेंद्र : इंसान की शक्ल में हैवान 
  • 14 लोगों की हत्या की थी जिले के पहले साइको किलर ने
  • दो इंसानों को मारकर खाया था भेजा, अपने ही गिरोह में शामिल तीन को मार डाला था
  • पत्रकार धीरेंद्र के कत्ल के बाद खूनी चेहरा सामने आया
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prayagraj news : राजा कोलंदर (फाइल फोटो)। - फोटो : prayagraj
राजा कोलंदर। एक ऐसा शख्स जिसका नाम लेते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसे नाम से ज्यादा जिले का पहला साइको किलर, इंसान की शक्ल में हैवान, खूनी दरिंदा आदि नामों से जाना जाता है। वह अपराध सिर्फ इसलिए नहीं करता था कि वह अपराधी था या अपराध करना उसकी फितरत थी। अपराध उसकी मानसिक खुराक थी। हत्या तो बहुत से अपराधियों ने की होगी लेकिन इंसान को मारकर उसका भेजा खाने वाला नर पिशाच शायद इकलौता कोलंदर होगा। पत्रकार धीरेंद्र की हत्या के बाद जब उसके आपराधिक कारनामों को खुलासा हुआ तो लोगों को यकीन नहीं हुआ कि उनके बीच का कोई शख्स इस कदर हैवान हो सकता है। इस हैवान ने सन 2000 में शहर को दहला दिया था। 
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prayagraj news : राजा कोलंदर (फाइल फोटो)। - फोटो : prayagraj
एक हिंदी दैनिक के पत्रकार धीरेंद्र सिंह 14 दिसंबर 2001 को रहस्यमय तरीके से लापता हो गए। वे दफ्तर से घर जाने की बात कहकर निकले थे। दो दिन बाद भी वह नहीं लौटे तो खोजबीन शुरू हो गई। कुछ पता नहीं चला। उस वक्त मोबाइल का चलन आम नहीं था। पुलिस को न तो सर्विलांस का पता था और न ही काल रिकार्ड्स के बारे में। दफ्तर वालों की सलाह पर पुलिस ने कॉल रिकार्ड्स को चेक किए।

धीरेंद्र के मोबाइल गायब होने के बाद उस मोबाइल से दो कॉल हुई थी। एक सांसद के बेटे के अलावा कातिल ने अपने घर पर भी बात की थी। पुलिस ने सांसद के बेटे को उठाया और उस घर का पता किया जहां से कॉल की गई थी। पुलिस तेजी से काम कर रही थी। कातिल का पता चल गया था। कीडगंज के तत्कालीन एसओ एसएन त्रिपाठी ने नैनी स्थित एक पिगरी फार्म में दबिश दी। यहीं राजा कोलेंद्र से दुनिया का सामना हुआ।
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फाइल फोटो
कोलंदर टाटा सूमो से कहीं भागने के फिराक में था। पुलिस उसे कीडगंज थाने में ले आई। वह किसी भी सूरत में यह मानने को तैयार नहीं था कि उसने धीरेंद्र का कत्ल किया है। धीरेंद्र को उसने अपना मित्र बताया। इसी दौरान उसने राज खोला कि वह वाहनों को लूट कर ड्राइवरों की हत्या करने वाला गिरोह चलाता है। जिस टाटा सूमो के साथ वह पकड़ा गया है, वह रायबरेली के एक युवक को मारकर लूटी गई है। उसने कई अपराध स्वीकार किए लेकिन धीरेंद्र की हत्या की बात उसने नहीं कुबूली। अब पुलिस ने मनोवैज्ञानिक रूप से उसे तोड़ना शुरू किया। उसकी पत्नी और बच्चों को थाने लाया गया। यहीं कोलंदर टूट गया। उसने धीरेंद्र के विषय में तमाम बातें बताईं। बहरहाल खुलासा झकझोर देने वाला था। 

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
उसने बताया कि धीरेंद्र को उसने 15 दिसंबर की रात उस वक्त मार दिया जब वह पिगरी फार्म में आग ताप रहे थे। उसने पहले धीरेंद्र को गोली मारी फिर शव के कई टुकड़े कर यहां से लेकर रीवा और शहडोल तक टुकड़ों को फेंक दिया था। ऐसी नृशंस वारदात की बात सुनकर लोग सन्न रह गए। फिर शुरू हुआ कोलंदर से पूछताछ का दौर। अब उसके ऐसे-ऐसे कारनामे सामने आए कि वह दहशत का पर्याय बन गया। उसने एक एक करके 14 कत्ल की बात कुबूली। उसने करीब करीब एक ही तरीके से सबको मारा था। वह पहले पीठ पर गोली मारता था और फिर शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर देता था। टुकड़ों को दूर-दूर गड्ढों में दफन कर देता था।
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हत्या - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
कई लोगों को तो उसने अपने पिगरी फार्म में ही दफन कर दिया था। लगातार हत्याओं के बाद भी जब वह पकड़ा नहीं गया तो उसका मनोबल काफी बढ़ गया था। हत्या जैसा जघन्य अपराध उसके लिए शौकिया खेल हो गया। पुलिस ने कई स्थानों पर छापा कर उन लोगों की हड्डियां बरामद कीं, जिनकी उसने हत्या की थी। उसने काफी पैसा वाहनों को लूटकर कमाया था। एक सरकारी दफ्तर में एडहॉक पर काम करने वाले कोलंदर ने उस समय लाखों रुपये ब्याज पर बांट रखे थे। तत्कालीन एसएसपी पीके तिवारी ने इस कांड के खुलासे पर एसएसपी आफिस में प्रेस कांफ्रेंस कर इलाहाबाद पुलिस की तुलना स्काटलैंड यार्ड से की थी। 14 हत्याओं का आरोपी राजा कोलंदर आज भी नैनी जेल में बंद है। उसे खूंखार अपराधियों के साथ रखा गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

करीबी की खोपड़ी उबालकर खा ली थी

राजा कोलेंद्र ने सीओडी में काम करने वाले काली प्रसाद श्रीवास्तव को 50 हजार रुपये उधार दिया था। काली प्रसाद ने रुपये वापस नहीं किए लेकिन वह उसे अपराध कर पुलिस से बचने के अचूक नुस्खे बताता था। संयोग था कि 14 हत्याओं के बाद भी कोलेंद्र कभी पकड़ा नहीं गया। वह काली प्रसाद की बुद्धि का कायल था। हालांकि जब काली प्रसाद ने उसका पैसा नहीं लौटाया और कोलेंद्र को लगा कि वह पैसा नहीं लौटाएगा तो उसने उसका भी वही हश्र किया। वह काली प्रसाद को लेकर शंकरगढ़ गया और टंडन वन के पास गला रेतकर उसे मार डाला। उसकी खोपड़ी को वह पिगरी फार्म ले आया और उबालकर इसलिए खा लिया कि उसकी बुद्धि बहुत तेज थी और कोलेंद्र को अपनी बुद्धि भी तेज करनी थी। 

पत्नी फूलन तो बेटा कलेक्टर

राजा कोलंदर खुद साइको था ही पूरे परिवार को भी मनोरोगी कर दिया था। उसकी पत्नी का नाम गोमती था। शादी के बाद उसने पत्नी का नाम बदलकर फूलन देवी रख दिया था। बेटे का नाम कलेक्टर तो दूसरे का नाम विधायक रखा था। इसी तरह वह मिलने जुलने वालों को भी कोड नाम देता था। हत्या के बाद अपने गिरोह के लोगों से वह इसी कोड में बात करता था। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
जघन्य हत्याओं से रंगे हाथ
साइको किलर ने धीरेंद्र सिंह के अलावा काली प्रसाद श्रीवास्तव, पवन कुमार यादव, हटिया नसीम, रति श्रीवास्तव, त्रिभुवन पांडेय, पप्पू पासी और सुल्ताना समेत 14 लोगों के खून से हाथ रंगे थे। कुछ ड्राइवरों के नाम तक पता नहीं चल पाए थे। 

राम निरंजन से बना राजा कोलंदर
शंकरगढ़ के हिनौता गांव  का रहने वाला राम निरंजन अपने गांव में शुरू से ही सनकी माना जाता था। छिवकी आर्डिनेंस डिपो में एडहाक पर वह नौकरी करने लगा तो वहीं पास में पिगरी फार्म बना लिया। यहीं से वह अपराध की दुनिया में कूदा और खुद को राजा कोलंदर कहने लगा। वह प्रयास करता था कि सामने वाला भी उसे राम निरंजन न कहकर राजा कोलंदर ही कहे। राजा कोलंदर के काले कारनामों में शामिल रहे उसके साले बछराज को भी आजीवन कारावास की सजा हुई है। दोनों पहले नैनी जेल में थे। बाद में लखनऊ जेल पहुंचे। इन दिनों उन्नाव जेल में सजा काट रहे हैं।

कोलंदर के जीवन पर बन रही वेब सिरीज
राजा कोलंदर के जीवन पर वेब सिरीज बन रही है। उन्नाव के जेलर ने शूटिंग के लिए कोलंदर के साले बछराज को छोड़ने के लिए शंकरगढ़ एसओ से आख्या मांगी थी। एसओ ने गांव वालों से बात की तो पता चला कि अगर बछराज छूटकर आया तो गांव में तनाव हो सकता है। इसके बाद एसओ ने जेलर पूरी वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया।
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