यानी आगंतुक कक्ष में उस समय तक महंत जिंदा थे। बब्बू की मानें तो दोपहर करीब 12:15 बजे खाना खाने के बाद ही महंत आगंतुक कक्ष में किसी से मुलाकात के लिए नीचे आए थे। इसके बाद ऊपर नहीं गए। तब उन्होंने बब्लू और अन्य करीबी सेवादारों को बताया था कि कोई मिलने के लिए आने वाला है, तुम लोग आसपास ही रहना। लेकिन, इसके बाद के घटनाक्रम की किसी को भी जानकारी नहीं है।
मठ में प्रवेश करने के लिए मुख्य द्वार के अलावा एक रास्ता महाविद्यालय की तरफ से भी आता है। कहीं मुलाकाती और उसके साथ के लोग पीछे के रास्ते से मौत बनकर तो मठ में नहीं आए? सवाल उठता है कि महंत के कमरे में वह शख्स कब और किधर से पहुंचा, उस पर वहां आसपास महंत की ओर से पहले से निगरानी में लगाए गए सेवादारों की नजर क्यों नहीं पड़ी।