दिन में तेज धूप के बाद मंगलवार की शाम आसमान पर बादलों का डेरा हो गया गया। गरज-चमक के साथ बादल झूमकर बरसे। इससे पहले तेज हवाओं के साथ धूल भरी आंधी चली, जिससे अधिकांश इलाकों की बिजली गुल हो गई। वहीं, आंधी-पानी से गेहूं की तैयार फसल खेतों में गिर गई। रात में रुक-रुक कर बूंदाबांदी होती रही। खलिहानों में पड़े गेहूं के बोझ भी भीग गए। नुकसान की आशंका से किसान चिंतित हैं। बुधवार को भी भोर से ही बादल छाए रहे। सुबह साढ़े नौ बजे शहर समेत कई ग्रामीण अंचलों में तेज बारिश हुई। इसके बाद दिन भर बादलों की लुकाछिपी का खेल चलता रहा।
मंगलवार शाम से बादलों की आवाजाही शुरू हो गई। पश्चिमी विक्षोभ की वजह से रात में धूल भरी आंधी आई और इसके थोड़ी देर बाद गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई, जिससे गर्मी से फौरी राहत मिली। हालांकि, कई मोहल्लों में बिजली के तार टूटने और शाॅर्ट सर्किट से जंपर उड़ने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे परेशानी हुई। शहर के सिविल लाइंस, लीडर रोड, अतरसुइया, मीरापुर, शास्त्रीनगर, दारागंज, सोहबतियाबाग, कीडगंज, मुट्ठीगंज, चौक, कल्याणी देवी, करेली समेत कई इलाकों में बिजली गुल रही। शहर ही नहीं नैनी, झूंसी और फाफामऊ सहित ग्रामीण अंचलों में भी आंधी और पानी का कहर बरपा।
सोरांव के हरिसेनगंज, ददौली और मऊआइमा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सिर्फ 25 से 30 फीसदी किसानों ने ही गेहूं की कटाई-मड़ाई कर उपज सुरक्षित की है। अचानक बदला मौसम उन किसानों के लिए किसी आफत से कम नहीं है, जिनकी फसल खेतों में खड़ी है। भीरपुर, करछना, मेजा, कोरांव, मांडा समेत अन्य इलाकों में आंधी-बारिश किसानों के लिए परेशानी लेकर आई। मौसम वैज्ञानिक इविवि के शैलेंद्र राय के मुताबिक आठ अप्रैल तक हवाओं की गति तेज रहेगी। आंधी ही नहीं, गरज-चमक के साथ बारिश के आसार हैं। कहीं-कहीं बूंदाबांदी भी हो सकती है। इस दौरान पहले तापमान गिरेगा फिर अचानक बढ़ भी सकता है। फसलों को नुकसान हो सकता है, लेकिन लोगों को गर्मी से राहत भी मिलेगी।