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प्रयागराज : बाढ़ से घिरे मकानों की पहली मंजिल डूबी, पानी में गृहस्थी बर्बाद

Mon, 09 Aug 2021 11:22 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • पानी आने के बाद छतों पर टिके लोगों ने आशियाना छोड़ा, कहीं तिरपाल डाली गई तो कहीं सड़क की पटरियों पर जमा बाढ़ पीड़ितों का डेरा
  • नावों से बाढ़ में फंसे लोगों को पहुंचाई जा रही खाद्य सामग्री, सुरक्षित आश्रय की तलाश में भटक रहे लोग
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prayagraj news : बाढ़ के पानी से छोटा बघाड़ा क्षेत्र में एक तल तक लोगों के घर डूब गए हैं। - फोटो : prayagraj
एडीजी आवास से महज सौ मीटर दूर नेवादा के घरों में पानी आने के बाद अमन अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पहली मंजिल पर इस आस में रुका रहा कि बाढ़ थम जाएगी, लेकिन सोमवार को पूरा मकान डूबने लगा तो वह अपने बच्चों को दोनों कंधों पर लेकर किसी तरह जलमग्न गलियों से निकलकर राहत शिविर में पहुंच गया। इन दिन खतरे के निशान से गंगा के 50 सेमी ऊपर बहने के बाद कछार से ज्यादातर घरों की पहली मंजिल डूब गई। इससे बड़े तटीय इलाकों में हाहाकार मच गया। देर रात तक लोग बाढ़ से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेते रहे।
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prayagraj news : अशोक नगर नेवादा से लेकर बेली इलाके तक बाढ़ के पानी डूबे घर। इस दौरान हर तरफ पानी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - फोटो : prayagraj
अमन की तरह बड़ी संख्या में लोगों ने सोमवार को घर डूबने के बाद कहीं तिरपाल डाल ली तो कहीं सड़कों की पटरियों पर चूल्हा जलाने के लिए मजबूर हो गए। नेवादा में डिवाइन स्कूल के पास किराये के मकान में रहने वाले रोशन भी की पूरी गृहस्थी डूब गई। उसने बताया कि रात को उम्मीद थी कि पानी घर जाएगा, इस आस में वह अपने परिवार के साथ छत पर सोया रहा, लेकिन सुबह नींद खुली तो चौकी, बिस्तर, टीवी, आलमारी सब कुछ डूब चुका था।
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prayagraj news : तेजी से बढ़ रहा है गंगा-यमुना का जलस्तर। - फोटो : prayagraj
इसके बाद साइकिल से बच्चों को लेकर वह शरणालय पहुंच गया। बाढ़ में फंसे बच्चे बेहाल रहे तो बुजुर्गों की आंखों में मुसीबत के आंसू भरे नजर आए। बेली में बाढ़ आने के बाद बेघर हुई 70 वर्षीया सुखरानी आटा,चावल भीगने की वजह से बिलखती रही। इस दिन गंगा-यमुना कछार से बढ़कर रिहायशी इलाकों में घुसने लगी। देर रात तक सघन आबादी वाली 30 से अधिक कलोनियों में पानी घुस गया। पानी भरने से बड़ी संख्या में लोग मुसीबत का सामना करने लगे। गंगानगर और राजापुर की भी कलोनियां पानी से भर गईं। बेली में हजारों घरों की पहली मंजिल डूब गई है।

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prayagraj news : गंगा-जमुना का जल स्तर बढने पर रसूलाबाद के घरों में पानी भरने पर नाव से आते लोग। - फोटो : prayagraj
बड़ी संख्या में लोगों को राहत कैंप में पहुंचाया जा चुका है। इसके अलावा ग्रामीण इलाके से जुड़े लोग अपने गांव चले गए हैं तो हजारों लोगों ने अपने परिचितों के घरों में शरण ली है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जो लोग फंसे हुए हैं, उनके सामने पिछले तीन दिन से बिजली और पानी का संकट पैदा हो गया है। बाढ़ से घिरे मकानों में रुके लोग बिजली -पानी की किल्लत का भी सामना कर रहे हैं। नावों से उन तक खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है। शिविरों में शरण लेने वालों को प्रशासन की ओर से खाने के पैकेट दिए जा रहे हैं, लेकिन दिक्कतें बनी हुई हैं। छोटा बघाड़ा में भी एक मंजिल तक घरों पानी में पूरी तरह भर चुका है।
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prayagraj news : बघाड़ा क्षेत्र में पानी से घिरा मकान। - फोटो : prayagraj
रात आठ बजे का जलस्तर

फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 85.35 मीटर, छतनाग में 84.58 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 85.19 मीटर तक पहुंच गया।

पालतू जानवरों को लेकर बढ़ी मुसीबत,चारे का संकट
शहर के कछारी इलाके में बाढ़ से पालतू गाय-भैंसों के लिए भी जगह नहीं बची है। ऐसे लोग अपने जानवरों को लेकर परेशान हैं। उनके लिए चारे का भी संकट पैदा हो गया है। द्रोपदी घाट पर दूध का कारोबार करने वाले परिवारों ने अपनी गायों, भैसों को सीडीए पेंशन के पास खाली जगहों पर पहुंचा दिया है।
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