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साहब! काहे परेशान हो रहे हो, इतनी जल्दी मुझे नहीं लगने वाली फांसी-वासी...

Thu, 04 Mar 2021 02:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नैनी (प्रयागराज)

सार

  • नैनी जेल की हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया है अमरोहा का सलीम
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शबनम और सलीम - फोटो : अमर उजाला
अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्रके गांव बावनखेड़ी में प्रेमिका शबनम के साथ मिलकर उसके परिवार के सात लोगों को निर्ममता से मौत के घाट उतारने वाला सलीम फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी बेफिक्र है। उसका कहना है कि साहब! काहे परेशान हो रहे हो, इतनी जल्दी मुझे न लगेगी फांसी वासी, यहां ऐसे थोड़े फांसी लग जाती है। इतने विकल्प खुले हैं कि हमको फांसी लगते-लगते अभी वर्षों लग जाएंगे। सलीम ने माशूका के कहने पर उसके माता-पिता, दो भाई, एक भाभी, रिश्ते की बहन को कुल्हाड़ी से काट डाला था। 
 
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नैनी जेल - फोटो : अमर उजाला
यह बातें आज भी वह जेल में साथी बंदियों को बताता है। नवंबर में अपनी दया याचिका पर हस्ताक्षर करने के लिए नैनी जेल में हाई सिक्योरिटी सेल से कार्यालय में लाए गए सलीम से जब वहां एक जेल अधिकारी ने कहा कि अब तो तुम्हें फांसी होकर रहेगी, तो उसने यह जवाब दिया कि यहां बचने के इतने विकल्प है कि फांसी होने में वर्षों लग जाएंगे। परेशान मत होइए साहब, हमें इतनी जल्दी कुछ नहीं होने वाला है। हालांकि जब उसकी प्रेमिका शबनम की दया याचिका राष्ट्रपति के यहां से खारिज हुई तो वह बेचैन हो गया था, लेकिन जैसे ही उसकी फांसी की तारीख एक बार आगे बढ़ी वह फिर से पुराने ढर्रे पर आ गया और शायरी लिखने लगा।
 
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Shabnam Case - फोटो : अमर उजाला
वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय ने बताया कि सलीम को कोई पश्चाताप न पहले था और न आज है। हालांकि जेल में उनकी जानकारी में उसने ऐसी कोई हरकत नहीं की और न कर रहा है, जिससे कि कोई परेशान है। उसका व्यवहार भी सबसे अच्छा रहता है। साथी कैदियों की मदद भी करता है। पांच वक्त का नमाजी है। हां शबनम को जरूर याद करता रहता है। 


 

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नैनी जेल - फोटो : सोशल मीडिया
सलीम को 27 सितम्बर 2018 को प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल लाया गया था। इससे पहले वो बरेली जेल में बंद था। बरेली की जेल में फांसी की सुविधा नहीं होने की वजह से सलीम को यहां शिफ्ट किया गया था। सलीम जब बरेली की जेल में था तो उस वक़्त वहां के प्रभारी पीएन पांडेय ही थे, जो इस समय नैनी सेंट्रल जेल के सीनियर सुप्रीटेंडेंट हैं। डीआईजी का भी चार्ज देख रहे वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय का कहना है कि सलीम एक प्रशिक्षित कारीगर है। उसने जेल में ही लकड़ी के काम का प्रशिक्षण लिया था। वह बढ़ई का काम बहुत बढ़िया करता है। चूंकि नैनी जेल में लकड़ी का बड़े स्तर पर काम होता है। यहां लकड़ी के फर्नीचर बहुत बनते हैं, इसलिए सलीम ने यहां पर बहुत शानदार फर्नीचर बनाए हैं। 
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महिला कैदी शबनम - फोटो : Social Media
अमरोहा के बावनखेड़ी में 14 अप्रैल 2008 को शबनम के माता-पिता, दो भाई, भाभी, 10 महीने के दुधमुंहे भतीजे और रिश्ते की बहन की गला काटकर हत्या कर दी गई थी. घर में अकेले शबनम ही बची हुई थी. इसी से पुलिस को शक हुआ। बाद में पता चला कि शबनम ने ही अपने आशिक सलीम के साथ मिलकर पूरे परिवार की हत्या की थी।  दरअसल, शबनम और सलीम एक दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन शबनम के परिवार को ये रिश्ता मंजूर नहीं था। शबनम ने दो विषयों में मास्टर डिग्री ले रखी थी। वो एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका थी।
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