मकर संक्रांति स्नान पर्व से एक दिन पहले बुधवार को तीर्थराज प्रयाग की पावन धरती आस्था, श्रद्धा और उल्लास के सागर में डूबी नजर आई। संगम में पुण्य स्नान के लिए देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मेला प्रशासन के अनुसार शाम पांच बजे तक 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम और विभिन्न घाटों पर पवित्र डुबकी लगाई।
भोर चार बजे से ही स्नान का सिलसिला शुरू हो गया था। संगम नोज के अलावा नैनी के अरैल, झूंसी और संगम क्षेत्र के प्रमुख स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों की मौजूदगी से घाट पूरी तरह पटे रहे।
लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, रीवा, वाराणसी सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु ट्रेन, बसों और निजी वाहनों से मेले में पहुंचे। यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की वजह से लोगों को किसी प्रकार की अव्यवस्था का सामना नहीं करना पड़ा।
श्रद्धालु मीलों पैदल चलकर स्नान घाटों तक पहुंचे, लेकिन उनके उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। हर चेहरा संगम में डुबकी लगाने की लालसा और पुण्य प्राप्ति की खुशी से दमक रहा था। संगम स्नान के बाद अधिकतर श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार दान भी किया। इसके साथ ही अक्षयवट और लेटे हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जयकारों और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। चारों ओर उत्सव जैसा माहौल था, मानो आस्था का विशाल संगम स्वयं जीवंत हो उठा हो।