live surgery
डॉक्टरों के मुताबिक एक निजी अस्पताल में दो सर्जरी का औसत मान लिया जाए तो सामान्य दिनों में एक दिन में करीब 700 छोटे-बड़े ऑपरेशन होते रहे हैं। अब इनकी संख्या दस फीसदी ही बची है, वो भी गंभीर मरीजों के उपचार तक सिमटी है। इस हिसाब से पिछले दो महीने में करीब 40 हजार सर्जरी के मरीजों को आपरेशन का इंतजार है।
सृजन अस्पताल के निदेशक डॉ. बीबी अग्रवाल बताते हैं कि प्लान सर्जरी ठप है। गिल्टी, गांठ, सिस्ट, ट्यूमर, हर्निया आदि के मरीज परेशान हैं। लॉक डाउन में वे आएं भी तो सर्जरी संभव नहीं है। वहीं स्त्री प्रसूति रोग के विशेषज्ञ भी प्रसव संबंधी ऑपरेशन ही कर रहे हैं। एसआरएन अस्पताल में कॉडियोलॉजी विभाग के डॉ. पीयूष सक्सेना का कहना है कि यही हार्ट अटैक के गंभीर मरीजों का भी है। सर्जरी नहीं, सिर्फ दिल के मरीजों को दवाएं दी जा रही हैं। चिकित्सक स्टेंट, पेसमेकर लगाने समेत अन्य सर्जरी नहीं कर रहे हैं। सिर्फ गंभीर मरीजों का उपचार कर उनकी जान बचाई जा रही है।