कोरोना संक्रमण के कारण लंबे चले लॉक डाउन ने कंपनियों की उत्पादन क्षमता और बिक्री को काफी प्रभावित किया है। छोटे-मोटे उद्योग धंधे तो बंद होने की कगार पर पहुंच गए। लेकिन, इन सबके बीच पारले-जी की पौ बारह रही। आर्थिक संकट के दौरान भी कंपनी का उत्पादन बढ़ता रहा और इसके साथ ही बिक्री भी। लॉक डाउन में पारले-जी बिस्किट का प्रोडक्शन अकेले प्रयागराज के इंडस्ट्रियल एरिया में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गया। नौबत यहां तक आ गई कि मैन पावर और रा-मैटेरियल की कमी की वजह से वर्क आर्डर पूरा करने में फ्रेंचाइजी कंपनी को काफी दिक्कतों का सामान करना पड़ा।
सबसे पुरानी और बड़ी बिस्किट निर्माता कंपनी की पूरे देश में करीब 105 प्रोडक्शन यूनिटें हैं, जो फ्रेंचाइजी बेस्ड हैं। नैनी के इंडस्ट्रियल एरिया में तिरुपति बेकर्स प्राईवेट लिमिटेड ने पारले-जी की फ्रेंचाइजी ली है। जिसके डायरेक्टर संजय रतनानी व जनसंपर्क अधिकारी श्याम सिंह हैं। यहां पर सामान्य दिनों में करीब मैकेनिकल टीम समेत करीब 200 लोग काम करते हैं। यहां की प्रतिदिन की प्रोडक्शन क्षमता करीब 140 टन है लेकिन सामान्य दिनों में औसतन 40 से 45 टन प्रतिदिन का प्रोडक्शन ही होता था।
लॉकडाउन में यह बढ़कर 55 से 60 टन प्रतिदिन पर पहुंच गया। इसके बाद अनलाक वन शुरू होते ही प्रोडक्शन में और तेजी आई। इसकी वजह इस बिस्किट की हर तबके के बीच पहुंच बताई जाती है। लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों के बीच भी इसका वितरण उत्पादन बढ़ाने में सहायक साबित हुआ।
पारले-जी का ओवरआल बिजिनेस बढ़ा है। शुरूआती दौर में हमें रा-मैटेरियल और मैनपावर की कमी की वजह से काफी दिक्कत हुई लेकिन बाद में स्थिति धीरे-धीरे ठीक हो गई। हमने दिन रात मेहनत करके यहां भी 15 से 20 प्रतिशत प्रोडक्शन की बढ़ोत्तरी की है, जो सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा है। संजय रतनानी, डायरेक्टर तिरुपति बेकर्स प्राइवेट लिमिटेड,
(सीएमयू पारले-जी बिस्किट), इंडस्ट्रियल एरिया, नैनी, प्रयागराज