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आर्थिक सुस्ती के बीच प्रयागराज में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गया पारले जी का प्रोडक्शन

Sat, 20 Jun 2020 12:52 PM IST
विनोद सिंह सूर्य प्रकाश त्रिपाठी, प्रयागराज
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parle g - फोटो : social media
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कोरोना संक्रमण के कारण लंबे चले लॉक डाउन ने कंपनियों की उत्पादन क्षमता और बिक्री को काफी प्रभावित किया है। छोटे-मोटे उद्योग धंधे तो बंद होने की कगार पर पहुंच गए। लेकिन, इन सबके बीच पारले-जी की पौ बारह रही। आर्थिक संकट के दौरान भी कंपनी का उत्पादन बढ़ता रहा और इसके साथ ही बिक्री भी। लॉक डाउन में पारले-जी बिस्किट का प्रोडक्शन अकेले प्रयागराज के इंडस्ट्रियल एरिया में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गया। नौबत यहां तक आ गई कि मैन पावर और रा-मैटेरियल की कमी की वजह से वर्क आर्डर पूरा करने में फ्रेंचाइजी कंपनी को काफी दिक्कतों का सामान करना पड़ा। 

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सबसे पुरानी और बड़ी बिस्किट निर्माता कंपनी की पूरे देश में करीब 105 प्रोडक्शन यूनिटें हैं, जो फ्रेंचाइजी बेस्ड हैं। नैनी के इंडस्ट्रियल एरिया में  तिरुपति बेकर्स प्राईवेट लिमिटेड ने पारले-जी की फ्रेंचाइजी ली है। जिसके डायरेक्टर संजय रतनानी व जनसंपर्क अधिकारी श्याम सिंह हैं। यहां पर सामान्य दिनों में करीब मैकेनिकल टीम समेत करीब 200 लोग काम करते हैं। यहां की प्रतिदिन की प्रोडक्शन क्षमता करीब 140 टन है लेकिन सामान्य दिनों में औसतन 40 से 45 टन प्रतिदिन का प्रोडक्शन ही होता था।

लॉकडाउन में यह बढ़कर 55 से 60 टन प्रतिदिन पर पहुंच गया। इसके बाद अनलाक वन शुरू होते ही प्रोडक्शन में और तेजी आई। इसकी वजह इस बिस्किट की हर तबके के बीच पहुंच बताई जाती है। लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों के बीच भी इसका वितरण उत्पादन बढ़ाने में सहायक साबित हुआ। 
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पारले-जी का ओवरआल बिजिनेस बढ़ा है। शुरूआती दौर में हमें रा-मैटेरियल और मैनपावर की कमी की वजह से काफी दिक्कत हुई लेकिन बाद में स्थिति धीरे-धीरे ठीक हो गई। हमने दिन रात मेहनत करके यहां भी 15 से 20 प्रतिशत प्रोडक्शन की बढ़ोत्तरी की है, जो सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा है। संजय रतनानी, डायरेक्टर तिरुपति बेकर्स प्राइवेट लिमिटेड,
(सीएमयू पारले-जी बिस्किट), इंडस्ट्रियल एरिया, नैनी, प्रयागराज

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parle g - फोटो : अमर उजाला

पारले-जी प्रोडक्शन की 10 प्रमुख बातें

  1. नैनी स्थित तिरुपति बेकर्स प्राइवेट लिमिटेड सीएमयू पारले-जी बिस्किट प्राइवेट लिमिटेड, इंडस्ट्रियल एरिया में इस समय करीब 150 कर्मचारी दो शिफ्ट में कार्य कर रहे हैं।
  2. लॉकडाउन के पहले चरण में 21 मार्च से 31 मार्च तक यहां का प्रोडक्शन पूरी तरह से बंद हो गया था। जिससे कर्मचारियों में नौकरी जाने का डर सताने लगा था।
  3. बंद की समयावधि में आपूर्ति के लिए वाराणसी और कानपुर से पारले-जी की यहां सप्लाई की गई।
  4. 01 अप्रैल से 20 अप्रैल तक सिर्फ सिंगल शिफ्ट में कार्य किया गया। मैन पावर व लॉक डाउन की गाईडलाइन के अनुपालन एवं कर्मचारियों के घर चले जाने तथा रा-मैटेरियल की अनुप्लब्धता के चलते।
  5. 21 अप्रैल से दो शिफ्ट में कार्य किया गया, तब प्रोडक्शन बढ़ा और वर्क आर्डर भी पूरा होने लगा।
  6. यहां सामान्य दिनों में 1000 से 1200 टन प्रतिमाह का प्रोडक्शन होता था, जो लॉक डाउन में 1500 से 1800 टन हो गया है।
  7. जून माह में 2000 टन का वर्क आर्डर है, जिसे पूरा करने में पूरी टीम लगी हुई है।
  8. पारले-जी के यहां दो डीपो हैं, एक नैनी में और दूसरा हनुमानगंज में। यहां तैयार होने वाला सामान इन्हीं दो डीपो में भेजा जाता है। जहां से सप्लाई होती है।
  9. पारले-जी के 90 प्रतिशत प्रोडक्ट प्रयागराज लोकल में ही आपूर्ति किए जाते हैं। बाकी 10 प्रतिशत अन्य शहरों में भेजे जाते हैं।
  10. लॉकडाउन में कंपनी की तरफ से गरीबों और प्रवासियों को एक लाख पैकेट पारले-जी बिस्किट बांटे गए।
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