बहुमूल्य कलाकृतियों केकोआर्डिनेटर डॉ लवकुश द्विवेदी ने बताया कि प्रदेश भर में मंदिरों, तीर्थों के सर्वे की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग को सौंपी गई है। इसमें पौराणिक काल के मंदिरों, प्रतिमाओं और तीर्थों केअलावा जैन और बुद्ध प्रतिमाओं को भी सूचीबद्ध किया जाएगा। निजी स्वामित्व वाले मंदिरों का भी विवरण जुटाया जाएगा। प्रतिमाओं की नंबरिंग के बाद उनका डाटा बेस तैयार किया जाएगा।
इसके लिए इन मंदिरों, प्रतिमाओं को चिह्नित किया जा रहा है। प्रयागराज के पौराणिक और दुर्लभ प्रतिमाओं, मंदिरों नागवासुकि, द्वादश माधव, दुर्वासा आश्रम, भरद्वाज मुनि आश्रम के अलावा अंदावा स्थित प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभदेव की तपस्थली व कौशांबी में राजा उदयन का किला व बौद्ध प्रतिमाओं व स्तूपों को सूचीबद्ध किया जाएगा।
मंदिरों को सूचीबद्ध करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए निर्धारित प्रारूप में मंदिरों, तीर्थों को विवरण तैयार कराया जा रहा है। डॉ आरएन पाल, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, प्रयागराज।