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सुरक्षाकर्मियों को छोड़ अदालत में कोई न ले जाए असलहे ः हाईकोर्ट

Thu, 27 Feb 2020 09:35 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर अदालत में गोली मारकर हत्या की घटना के बाद जिला अदालतों की सुरक्षा बढ़ाने के कार्य की मॉनिटरिंग कर रहे हाईकोर्ट ने कहा है कि अदालतों मेें सिर्फ सुरक्षाकर्मियों को ही असलहे ले जाने की छूट दी जाए। इसके अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति को ऐसी अनुमति न दी जाए। कोर्ट ने सीसी टीवी कैमरे के जरिए प्रदेश की अदालतों की सुरक्षा निगरानी  तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया है।  

कहा है कि तकनीकी विशेषज्ञों की जिलों में जरूरत के अनुसार नियुक्ति की जाए।कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग को इसकी व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। सुरक्षा मामले की सुनवाई के लिए गठित स्पेशल बेंच के जज न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ मामले की सुनवाई कर रही है।
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दिल्ली हाईकोर्ट
कोर्ट ने कहा है कि सुरक्षा बलों के अलावा किसी को भी अदालत परिसर में असलहा लेकर प्रवेश न करने दिया जाए। इस आदेश की अवहेलना करने वाले को जेल भेजा जाए। कोर्ट ने बायोमेट्रिक कार्ड के जरिए अदालतों में प्रवेश की व्यवस्था  की जाए। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कोर्ट को बताया कि बायोमेट्रिक कार्ड के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
सीओपी कार्ड प्रवेश का आधार नहीं

यूपी बार कौंसिल द्वारा  सीओपी कार्ड (सर्टीफिकेट ऑफ  प्रैक्टिस) को अदालतों में प्रवेश का आधार मानने की मांग हाईकोर्ट ने नामंजूर कर दी है। कोर्ट ने कहा कि सीओपी प्रवेश का आधार नहीं है। हांलांकि इसका व्योरा बायोमैट्रिक कार्ड में दर्ज होगा। और इससे प्रदेश की हर अदालत में प्रवेश की अनुमति होगी। प्रयागराज व लखनऊ में सर्वर में अधिवक्ताओं का डाटा तैयार किया जाएगा।

कोर्ट ने राज्य सरकार खासकर अपर मुख्य सचिव गृह व  सहयोगी अधिकारियों द्वारा कार्य योजना को जमीनी स्तर पर अमल में लाने की प्रशंसा की है। किन्तु ब्लैक लिस्टेड  यूपीआरएल से काम लेने के लिए कहा है। कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग को कैमरों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों की तैनाती करने निर्देश दिया है।

मेरठ में कचहरी और अदालत परिसर को  अलग करने के लिए बाउंड्रीवाल बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिला अदालत में अधिवक्ताओं का एडवोकेट रोल तैयार किया जा रहा है।  इस मुद्दे पर 20 मार्च को सुनवाई होगी। शेष मुद्दों पर छह अप्रैल को सुनवाई होगी।
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