प्रयागराज में कुंभ आरंभ हो चुका है, ऐसे में लोग देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भारी संख्या में यहां गंगा स्नान करने आ रहे हैं। अब अगर आपका भी कुंभ स्नान का प्लान बन रहा है तो बस 2 दिन में इन खास स्थानों पर जानें से आपकी ट्रिप यादगार बन सकती है। हम आपको बताते है कि संगम स्नान के बाद आप किन स्थानों पर आसानी से जा सकते हैं। आगे की स्लाइड्स पढ़ें...
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लेटे हुए हनुमान जी
प्रयागराज क्षेत्र के संगम तट पर स्थित प्राचीन हनुमान जी का मन्दिर है। यह मन्दिर धरती का एकमात्र मन्दिर है जिसका विवरण पुराणों में भी मिलता है। पूरी पृथ्वी पर यही एकमात्र मन्दिर है जिसमें हनुमान जी के लेटे हुए रुप का विवरण है। हर वर्ष गंगा मैया खुद उन्हें स्नान कराती हैं। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में सभी मन्नतें पूरी होती हैं। कथा है कि औरंगजेब और उसकी भीषण सेना ने हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की खूब कोशिश की लेकिन वह टस से मस न कर सके। सैनिक गंभीर रूप से बीमार हो गए और हारकर उन्हें वहां से लौटना पड़ा।
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अक्षयवट के दर्शन करते हुए सीएम योगी
- फोटो : अमर उजाला
अक्षयवट
अकबर के किले में प्रसिद्ध अक्षयवट वृक्ष भी मौजूद है। मान्यता यह है कि गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम की वजह से ही इस अक्षय वट की उत्पत्ति हुई है। इसके दर्शन के बाद ही संगम पर स्नान करने वालों के सभी कामना पूरी होती है। यह बरगद का वृक्ष बहुत प्राचीन है। वैसे तो पूरा किला क्षेत्र सेना के अधिकार में रहता है और यहां आम लोगों का जाना प्रतिबंध रहता है लेकिन कुंभ मेले को देखते हुए सरकार ने इसे आम लोगों के लिए 450 वर्षों बाद खोला है।
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सरस्वती प्रतिमा का पूजन करते सीएम योगी
- फोटो : ANI
सरस्वती कूप
सरस्वती कूप किला क्षेत्र के अंदर ही स्थित है इसके बारे में मान्यता यह है कि जब मां सरस्वती धरती में समा गयी थी तब भगवान बेणी माधव ने सरस्वती जी पूजा अर्चना किये थे खुश होकर मां सरस्वती इसी कूप से प्रकट हुई थीं। फिलहाल सरस्वती कूप पर सरकार शोध करने जा रही है।
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मनकामेश्वर मन्दिर
किला के पश्चिमी यमुना तट पर मिन्टो पार्क के निकट यह मंदिर स्थित है। यहां काले पत्थरों से बनी भगवान शिव का एक लिंग और गणेश एवं नंदी की मूर्तियां भी हैं। यहां हनुमान जी की भी एक बड़ी मूर्ति है और मंदिर के निकट एक प्राचीन पीपल का पेड़ है जिसकी लोग पूजा-अर्चना करते हैं।
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भारद्वाज आश्रम
भारद्वाज मुनि से सम्बद्ध यह एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। मुनि भारद्वाज के समय यह एक प्रसिद्ध शिक्षा का केन्द्र था। कहा जाता है कि भगवान राम अपने वनवास पर चित्रकूट जाते समय सीता जी एवं लक्ष्मण जी के साथ इसी स्थान पर विश्राम किये थे। वर्तमान में वहां भारद्वाजेश्वर महादेव मुनि भारद्वाज और प्राचीन काली देवी का मंदिर है। पास में ही भारद्वाज पार्क एवं नेहरु जी का आनन्द भवन है, आनंद भवन में ही एक संग्रहालय भी है। जहां घूमा जा सकता है।
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आनंद भवन
आनंद भवन
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय पं. जवाहर लाल नेहरु जी का आवास और आजादी के रणनीतियों का प्रमुख जगह जहां पं. जवाहर लाल नेहरु जी से जुड़ी चीजों को आप देख सकते हैं। यहीं पास में ही एक संग्रहालय भी है जहां तमाम ऐतिहासिक चीजों के बारे में आप जान सकते हैं।
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chandra shekhar park
चन्द्रशेखर आजाद पार्क
चन्द्रशेखर आजाद पार्क एक ऐतिहासिक जगह है जहां शहीद चन्द्रशेखर आजाद अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। कहा जाता है कि चन्द्रशेखर आजाद और सुखदेव राज यहीं आजादी को लेकर कोई रणनीति बना रहे थे कि अंग्रेज अचानक गोलीबारी करने लगे, दोनों तरफ से खूब गोलीबारी हुई। हांलाकि सुखदेव राज को भगाने में चन्द्रशेखर आजाद सफल रहे। अंग्रेजों की गोली से वे मरना नहीं चाहते थे इसलिए वे अंतिम गोली खुद को मार कर शहीद हो गये। यहां अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी का एक प्रतिमा भी है। यहां सुबह से शाम तक लोगों का जमवाड़ा लगा रहता है।
खुसरो बाग
खुसरो बाग मुगलकालीन स्थापत्य कला की एक बेहतरीन उदाहरण है। खुसरोबाग रेलवे स्टेशन से कुछ कदमों की दूरी पर बने मुगल स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने खुसरोबाग के सौंदर्यीकरण का काम इन दिनों तेजी पर है ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के बाद इस काम में तेजी आई है। खुसरोबाग वास्तव में सिर्फ एक बाग नहीं बल्कि यहाँ पर चार ऐतिहासिक मकबरे भी हैं ,जो कि बेहद आकर्षक और खूबसूरत हैं । सरकारी तन्त्र की लापरवाही के कारण इसकी हालत काफी खराब हो चुकी थी लेकिन इन दिनों फिर यह बगिया रौशन है ।मुख्य प्रवेश द्वार पर बड़े अक्षरों में इसका नाम लिखा गया है अंदर जगह जगह बैठने के लिए बेंच बनाई गई है साथ ही सुरक्षा के भी चाक चौबंद इंतजाम किए गए हैं। जिस कारण प्रतिदिन पर्यटक इसे देखने के लिए फिर से आने लगे हैं ।