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हम सब मनु की संतान
मानस अक्षयवट कथा के दौरान मोरारी बापू ने कहा कि कुछ लोग, कुछ लोगों को मनुवादी कहते हैं। मनु हमारे पूर्वज हैं, हम चाहे किसी भी वर्ग, धर्म से हो, सब मनु की संतान हैं। हम सब मनु से पैदा हुए हैं, इसीलिए हम मनुज कहलाएं। जैसे जल से जलज निकला वैसे ही हम मनु से मनुष्य कहलाएं। हम जिस मनु की संतान है वह स्वयं मन है। पृथ्वी के सभी जीव मनु के संतान है। कोई भले स्वीकार नहीं करें, आदि में जाओ, सत्य यही है। बापू ने कहा कि मैं मनुवादी नहीं हूं। मनु हमारा पिता है, लेकिन कोई वाद हमें पसंद नहीं।
बखानी प्रयागराज की माहिमा
मानस कथा के दौरान मोरारी बापू ने बताया कि तुलसीदासजी ने श्रीरामचरित मानस में लिखा है कि मन तीर्थराज प्रयाग है। तुलसीदासजी मन को प्रयाग कहते हुए लिखते हैं कि वहां भी एक अक्षयवट है। जब प्रलय आने पर कुछ भी नहीं बचता है। सब तरफ जल ही जल हो जाता है तब अक्षयवट सुरक्षित रहता है और अक्षयवट के एक पत्ते में प्रभु होते हैं। प्रलय से अक्षयवट डूब न जाए इसलिए वह बढ़ता जाता है, ऐसा पुराण में लिखा है।