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मिलों के पास गेहूं का स्टाक नहीं, आटे का गंभीर संकट

Sat, 28 Mar 2020 12:12 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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multigrain atta - फोटो : social media
प्रशासन के तमाम दावों के विपरीत गेहूं के आटे को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मिलों में गेहूं का स्टाक ही खत्म हो गया है। वहीं किसानों ने गेहूं की बिक्री रोक दी है तो बाजार बंद होने की वजह से व्यापारियों से भी मदद नहीं मिल पा रही। इससे मुश्किल और बढ़ गई है। इस समस्या से निजात के लिए मिल संचालकों ने एफसीआई में संपर्क किया लेकिन, वहां भी भाव को लेकर गतिरोध बन गया है।

इसके अलावा लॉकडाउन के बाद मजदूर भी अपने घरों को लौट गए हैं। ऐसे में लोगों को आटे की किल्लत का सामना तो करना ही पड़ सकता है, अधिक कीमत चुकाने के लिए भी तैयार रहना होगा।
गेहूं की नई फसल तैयार है। बारिश और ओलावृष्टि नहीं हुई होती तो अब तक मड़ाई भी शुरू हो जाती। नई फसल आने के बाद भाव में कमी की उम्मीद है। इस उम्मीद में ज्यादातर मिलों में गेहूं का स्टाक खत्म हो गया है। इसके विपरीत बेमौसम बारिश की वजह से कम पैदावार की आशंका है।
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प्रतिकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
इसलिए किसान पुराना गेहूं नहीं बेच रहे हैं। इसके अलावा सबकुछ बंद होने की वजह से भी मिल संचालक गेहूं नहीं खरीद पा रहे। मुश्किल यह कि एफसीआई की ओर से 27 रुपये प्रति किग्रा की दर से गेहूं आपूर्ति की बात कही जा रही है लेकिन, मिल संचालक इस कीमत पर गेहूं लेने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि बाजार से उन्हें कम मूल्य पर गेहूं मिल जाता था। उनका यह भी कहना है कि 100 किग्रा गेहूं में 90 किग्रा आटा निकलता है। ऐसे में 27 रुपये प्रति किग्रा की दर से गेहूं लेने पर एक किग्रा आटा तैयार करने में उन्हें 32-33 रुपये खर्च करने होंगे, जो काफी महंगा पड़ेगा। 

इसके अलावा संचालकों के सामने यह भी संकट है कि लॉकडाउन के बाद मजदूर घर चले गए हैं। इस तरह से मजदूरों तथा वाहनों का इंतजाम भी चुनौती है। आपूर्ति विभाग के एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि प्रशासन की ओर से जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आटे का संकट और गंभीर रूप ले लेगा।


जिले में हैं चार बड़ी तथा कई छोटी मिलें
जिले चार बड़ी मिलें हैं, जहां से आसपास के जिलों में ही नहीं दूसरे प्रदेशों में भी आटे की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा छोटी-छोटी दर्जनों मिलें हैं। ज्यादातर मिलों में गेहूं की कमी है। गेहूं है भी तो एक-दो दिनों के लिए। 

सरसों तेल की भी छोटी मिलें बंद, गहरा सकता है संकट

आने वाले दिनों में सरसो के तेल का भी संकट गहरा सकता है। यहां तेल की बड़ी मिल एक-दो ही हैं लेकिन कोल्हू का बड़ा व्यापार है। इनसे प्रयागराज के अलावा आसपास के जिलों में भी सरसों तेल की आपूर्ति होती है लेकिन लॉकडाउन के बाद इनमें भी ताला लग गया है। हालांकि , इस तरह की इकाइयों को आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की श्रेणी में रखा गया है लेकिन मजदूर नहीं मिल रहे। ऐसे में जल्द इंतजाम नहीं हुआ तो सरसो तेल की कमी से जूझना पड़ेगा।
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