मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं का समुद्र ऐसे उमड़ा कि जमाव़ड़े का अनुमान लगाने वाले दंग रह गए। फाफामऊ, झूंसी, जंक्शन, प्रयाग, सिविल लाइंस, नैनी, नेहरू पार्क सहित संगम की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर बस श्रद्धालुओं की कतारें ही दिखीं। भोर के धुंधलके से लेकर देर शाम तक पुण्य की डुबकी लगाने की कामना के साथ स्नानार्थियों का संगम क्षेत्र में उमड़ना जारी रहा। ‘एहू हाथे झोरा, ओहू हाथे झोरा, अ कान्हीं पर बोरी, कपारे पर बोरा’ के साथ अमवसा का मेला परवान चढ़ता रहा और जनकवि कैलाश गौतम की पंक्तियां कालजयी होती रहीं।