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प्रसाद और फूलमाला की दुकानें भी खुली रहीं। चूड़ी, बिंदी, सिंदूर और नारियल की दुकान चलाने वाले नरेश और मालती ने बताया कि तीर्थयात्रियों की आवाजाही शुरू हो गई है। ऐसे में धीरे -धीरे जिंदगी की गाड़ी पटरी पर आने लगी है। संगम पर गंगा पुजैया होने लगी। मंगल गीत भी महिलाएं गाने लगी हैं। तीर्थपुरोहित बड़का गुरु ने बताया कि संगम पर अब अस्थि विसर्जन व पिंडदान के लिए भी लोग आ रहे हैं।
इससे चौकियों पर तिलक-त्रिपुंड लगने के साथ ही संकल्प दिलाए जाने लगे हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी कड़ाई के साथ पालन कराया जा रहा है। अस्थि विसर्जन के दौरान भी नावों से सिर्फ दो लोग ही दूरी बनाकर संगम की धारा में जा रहे हैं। पिंडडान और पूजा के दौरान भी सामूहिकता से बचने की पूरी कोशिश की जा रही है।
हालांकि जिस संगम तट पर हर रोज देश, दुनिया से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंचते रहे हैं, वहां अभी कोरोना वायरस के डर की वजह से धीरे-धीरे आवाजाही शुरू हुई है। रविवार को को पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के कटनी, रीवा समेत कई जिलों के वाहनों से लोग गंगा स्नान और कर्मकांड के लिए पहुंचे।
संगम पर श्रद्धालु आने लगे हैं। ऐसे में तीर्थपुरोहितों को भी काम मिलने लगा है। संगम पर छाई उदासी टूटने लगी है।
राजेंद्र पालीवाल, महामंत्री, प्रयागवाल तीर्थपुरोहित सभा।