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मकर संक्रांति पर शोभन योग में लगेगी पुण्य की डुबकी, जानिए कब है स्नान का सबसे उत्तम मुहूर्त

Tue, 14 Jan 2020 01:09 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
इस बार सूर्य शोभन योग में मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस योग में सूर्य का राशि परिवर्तन बेहद फलदायी होगा। माघ कृष्ण पंचमी पर 15 जनवरी को मकर संक्रांति स्नान पर्व पर संगम पर पुण्य की डुबकी हर किसी के लिए खास होगी। इस तिथि पर सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही खरमास उतर जाएगा और शुभ घड़ी आरंभ हो जाएगी।
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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के साथ शोभन योग में मकर संक्रांति हर क्षेत्र में सफलता का सूचक बनेगी। इस योग से इस बार संगम स्नान का महत्व काफी बढ़ गया है। प्रयाग में मंगलवार की मध्यरात्रि के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, लेकिन स्नान सूर्योदय के साथ ही आरंभ होगा। इस मकर संक्रांति पर किया गया दान -पुण्य और अनुष्ठान फलदायी होगा। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही शनि-सूर्य का मिलन भी होगा। सूर्य और शनि दोनों ही ग्रह पराक्रमी हैं। ऐसे में सूर्य देव के मकर राशि में आने पर शनि की प्रिय वस्तुओं के दान से भक्तों के मार्ग की बाधाएं दूर होंगी।
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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार प्रयाग में यमुना का वास होने के कारण सूर्य और शनि की युति महापुण्य फलदायी होगी। इस संक्रांति पर्व पर स्नान, अन्न, वस्त्र के दान से आंतरिक ऊर्जा का संचार बढ़ेगा और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। मकर संक्रांति के दिन तिल से बनी वस्तुओं का दान कर लोग शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकेंगे। डॉ देवी प्रसाद गौड़ प्राच्य विद्या अनुसंधान संस्थान के निदेशक आचार्य अमिताभ के अनुसार बुधवार की सुबह 7:26 बजे सूर्य का मकर राशि में संचरण आरंभ हो जाएगा। 

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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज
मोक्ष की सीढ़ी के रूप में मकर संक्रांति पर्व की मान्यता
ज्योतिषाचार्य लोकनाथ चतुर्वेदी के अनुसार सनातन धर्म में मकर संक्रांति की मान्यता मोक्ष की सीढ़ी के रूप में है। इस तिथि पर भीष्म पितामह को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इस तिथि पर सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण होते हैं और खरमास समाप्त हो जाता है। प्रयाग में कल्पवास भी मकर संक्रांति से पूर्ण रूप से शुरू होता है। सनातन संस्कृति में इस दिन को सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 
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स्नान मुहूर्त
7:26 बजे सूर्य का मकर राशि पर संचरण 
पुण्यकाल
भोर में चार बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

महा पुण्यकाल
प्रात: 6:51 से 9:03 बजे तक
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भूमि आवंटन में गड़बड़ी से कल्पवासियों-संस्थाओं में छिड़ी रार,मंडलायुक्त से की गई शिकायत

भूमि आवंटन में गड़बड़ी से कल्पवासियों और संस्थाओं के संचालकों के बीच रार मच गई है। काली मार्ग दक्षिणी पटरी से उजाड़े गए कल्पवासियों ने तीर्थपुरोहितों की मदद से सोमवार को दोबारा कब्जा तो जमा लिया , लेकिन संस्था के संचालकों ने धमकी देकर मुसीबत बढ़ा दी है। इसकी शिकायत सोमवार को मंडलायुक्त आशीष कुमार गोयल से की गई। तीर्थपुरोहितों व कल्पवासियों ने विवाद के लिए मेला प्रशासन के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया है। लालटेन निशान वाले प्रयागवाल तीर्थपुरोहित राजेश तिवारी ने मंडलायुक्त को भेजे पत्र में मेला प्रशासन पर भूमि आवंटन में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। राजेश का कहना है कि काली मार्ग दक्षिणी पटरी पर जहां उनको वर्षों से भूमि  आवंटित होती आ रही है, वहां पर इस बार मेला प्रशासन के एक अफसर ने अपने गांव के करीबी की संस्था को भूमि आवंटित कर दिया है। रविवार को मेला प्रशासन के कुछ कर्मचारियों के उकसाने पर कई दिन से साधनारत कल्पवासियों के शिविरों को उजाड़ दिया गया और वृद्धों के साथ धक्कामुक्की की गई थी। 
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कल्पवासियों की डुबकी आसान बनाने को डीएम ने चेताया
कल्पवासियों के लिए स्नान घाट की समुचित व्यवस्था न होने की शिकायत पर सोमवार को डीएम ने मेलाधिकारी से जानकारी ली। डीएम के निर्देश पर प्रभारी मेलाधिकारी रजनीश मिश्र ने तीर्थ पुरोहितों के साथ काली मार्ग व मोरी मार्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान कल्पवासियों ने अफसरों को स्नान में आने वाली दिक्कतों से अवगत कराया। कल्पवासियों ने बताया कि उन्हें सुबह, शाम दोनों पहर शिविरों से बहुत दूर मोरी मार्ग के गंगोली शिवाला पांटून पुल के पास स्नान के लिए जाना पड़ता है। ठंड में बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह काली मार्ग पर बसे कल्पवासी मीलों दूर अक्षयवट मार्ग पर गंगा में डुबकी लगाने के लिए मजबूर हैं। निरीक्षण के दौरान प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष सुभाष पांडेय, महामंत्री राजेंद्र पालीवाल, राजेश तिवारी, अजय पांडेय,संतोष भारद्वाज, दिनकर पांडेय, गोपाल मिश्र, अनुज तिवारी, वीरेंद्र तिवारी, सुरेंद्र पांडेय, राम कृष्ण तिवारी, राम बाबू शर्मा, गौरव पांडेय, मनोज कराही, विजय मिश्र समेत तमाम कल्पवासी मौजूद थे।

 
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कल्पवासियों को दी गई संतुलित आहार की जानकारी
विश्व आयुर्वेद परिषद की ओर मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर सोमवार को संगम स्थित प्रभा ध्यान योग में विश्व मंगल दिवस मनाया गया। यहां भगवान धनवंतरि की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद आयोजित गोष्ठी में कल्पवासियों को संतुलित आहार के बारे में जानकारी दी गई। विश्व आयुर्वेद परिषद के काशी प्रांत अध्यक्ष डॉ. पीएस पांडेय ने कहा कि मकर संक्रांति पर सूर्य धनु को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। इस समय जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। परषिद उपाध्यक्ष डॉ. जे नाथ ने शिशिर ऋतु में कल्पवासियों के आहार के बारे में जानकारी दी। बताया कि कल्पवासियों को सुबह जल्दी उठकर नाश्ता जरूर करना चाहिए। भोजन में गेहूं, चना, मूंग, उड़द, बाजरा से बना भोजन ग्रहण करना चाहिए। दूध, शहर, सूखे मेवे घी के साथ लाभकर होते हैं। गाजर, चुकंदर, गन्ना, मूली टमाटर को आहार में शामिल करें। इसके अलावा योग और व्यायाम करना चाहिए। अधिक कोहरा और शीत में नहीं टहलना चाहिए। रजाई या कंबल से निकलकर सहसा खुले में जाने से बचें। यहां पर डॉ. एसएस उपाध्याय, डॉ. वीएस रघुवंशी, डॉ. शंकर मिश्र, डॉ. एससी दुबे, डॉ. ममता मिश्र, डॉ. शिशिर उपाध्याय आदि थे।  
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