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Magh Mela : कल्पवास के लिए संगम की रेती पर कदम-कदम पर सजीं यज्ञशालाएं, महीने भर एक बार भोजन, तीन प्रहर स्नान

Fri, 06 Jan 2023 05:30 AM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज

सार

यज्ञ भूमि मंत्रों, आहुतियों के साथ ही सत्संग, भजन, कीर्तन और कथाओं से शुक्रवार को गूंज उठेगी। पांच सेक्टर में बसे माघ मेले में कदम-कदम पर यज्ञशालाएं और हवन कुंड बनाए गए हैं। गृहस्थों ने आस्था के रंग में चोला रंगा लिया है।
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Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
तंबुओं के बीच बृहस्पतिवार को क्यारियां बनाकर धन-धान्य के प्रतीक रूप में जौ उगाए गए। द्वारों पर गमलों में तुलसी के बिरवा लगाकर यज्ञ शालाएं सजा दी गईं। बृहस्पतिवार को संगम स्नान के बाद मास पर्यंत एक प्रहर भोजन और तीन प्रहर स्नान का संकल्प लेकर लाखों दंपती महीने भर का कल्पवास आरंभ करेंगे। पौराणिक मान्यता के अनुसार कभी इसी रेती पर ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना के बाद प्रथम यज्ञ किया था।

यज्ञ भूमि मंत्रों, आहुतियों के साथ ही सत्संग, भजन, कीर्तन और कथाओं से शुक्रवार को गूंज उठेगी। पांच सेक्टर में बसे माघ मेले में कदम-कदम पर यज्ञशालाएं और हवन कुंड बनाए गए हैं। गृहस्थों ने आस्था के रंग में चोला रंगा लिया है। कोई गेरुआ बाना में तो कई लाल धोती-दुपट्टा और साफा में ध्यानमग्न होगा। रेती पर बनी वेदियों के बीच आस्था की अखंड ज्योति जलाने के लिए शिविरों में कल्पवासियों के परिजन जुटे रहे।
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Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
किसी के साथ बहुएं आईं हैं तो किसी के साथ बेटियां और नाती -पोते। साथ आए अपनों में से ही किसी ने तुलसी का चौरा बनाया तो किसी ने वेदियां सजाईं। गोरखपुर खजनी तहसील स्थित शुकुलपुर गांव से कल्पवास के लिए पत्नी के साथ सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारी राजेंद्र प्रसाद शुक्ल सुबह ही पहुंच गए। उनके साथ सेवा के लिए उनके चिकित्साधिकारी पुत्र डॉ. देवेंद्र प्रताप शुक्ल और शिक्षिका बहू चांदनी शुक्ला भी आई हैं।
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Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
बहू-बेटे ने दिन भर यज्ञ मंडप सजाया। शुक्रवार को वह सुबह स्नान के बाद संकल्प लेंगे। इसी तरह गोरखपुर से ही सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी राम रसीले तिवारी भी अपने परिजनों के साथ कल्पवास करने आ गए। सोनभद्र जिले के पसहीं गांव निवासी माहेश्वर पाठक अपनी पत्नी के साथ इस बार लगातार आठवें साल कल्पवास के लिए आए हैं।

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Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
सेक्टर तीन स्थित शिविर में उनकी पौत्री रागिनी और बहू मोनिका यज्ञ वेदी बनाने के साथ ही ध्वाजा-पताकाओं से तंबू सजाती रहीं। दोनों ने केले के पौधे भी यज्ञ मंडप के द्वार पर लगाए। मां दुर्गा का भव्य मंदिर सजाया है। लगातार 22वें वर्ष कल्पवास के लिए गोरखपुर के घघियान गांव से आए भोला तिवारी ने गेरुआ वस्त्र धारण कर लिया है। इसी तरह सेक्टर तीन में कल्पवास के लिए रुद्रपुर से आए रामेश्वर तिवारी लाल वस्त्र धारण कर शुक्रवार से लाल बाबा बन जाएंगे।
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Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
कल्पवास जीवन के कायाकल्प का अनुष्ठान है। मां गंगा की गोंद में महीने भर गुजारने और सत्संग के इस उत्सव का उन्हें वर्ष भर इंतजार रहता है। - राजेंद्र प्रसाद शुक्ल,निवासी शुकुलपुर, खजनी, गोरखपुर।   

रेती पर अब तक जो भी मनौती लेकर आता रहा हूं, उसे गंगा मइया पूरी करती रही हैं। यहां जो भी कामना की जाए, सब पूर्ण हो जाती है। गंगा मइया की महिमा अपार है। राम रसीले त्रिपाठी, सेवा निवृत्त पुलिस अधिकारी।

माता-पिता को कल्पवास कराने और उनकी सेवा के लिए अवकाश लेकर आया हूं। माता-पिता की सेवा का इससे बढ़कर कोई अवसर नहीं हो सकता है। ऐसे में पुण्य कमाने का यह मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहता। देवेंद्र प्रसाद शुक्ल- चिकित्साधिकारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैंसर बाजार, संत कबीर नगर।

मां गंगा के मास पर्यंत स्पर्श और दर्शन के साथ ही गोंद में प्रवास का यह सौभाग्य वर्ष में एक बार इस माघ महीने में ही मिलता है। मान्यता है कि तीर्थराज प्रयागराज में यहां इस मास में प्रवास करने के लिए देव, दनुज, किन्नर और नर सभी आते रहे हैं। डॉ. राधाचार्य, राधा आध्यात्मिक सत्संग मंडल, अपर संगम मार्ग।
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