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Magh mela: कोविड के खौफ पर आस्था भारी, पहुंचने लगे कल्पवासी

Tue, 12 Jan 2021 01:56 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, प्रयागराज
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magh mela - फोटो : prayagraj
माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व मकर संक्रांति में में अब सिर्फ दो दिन ही शेष हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के खौफ पर आस्था भारी पड़ने लगी है। कोरोना के डर को पीछे छोड़कर कल्पवासियों के शिविर आकार लेने लगे हैं। त्रिवेणी, काली मार्ग से लेकर ओल्ड जीटी-मोरी मार्ग तक आध्यात्मिक संस्थाओं के शिविरों में संतों-भक्तों के डेरे लगने से हलचल बढ़ गई है।
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magh mela - फोटो : prayagraj
इसके बीच न किसी केचेहरे पर कोरोना का भय है न मन में किसी तरह की चिंता। है, तो सिर्फ संगम की रेती पर अपनी-अपनी कामनाओं और मनौतियों को लेकर महीने भर के जप, तप और ध्यान की लालसा। ऐसे में रेती पर पर बिना किसी परवाह के लोग घर-बार छोड़कर पहुंचने लगे हैं।  
संतों-भक्तों के शिविरों में प्रथम स्नान पर्व को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में हैं। संगम में डुबकी लगाने के और कल्पवास करने के लिए लोग मंगलवार से ही आने लगेंगे।
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magh mela - फोटो : prayagraj
इस बार पुरुषोत्तम मास लगने की वजह से माघ मेले में कल्पवास की शुरुआत 28 जनवरी से होगी, लेकिन हजारों की तादाद में लोग मकर संक्रांति से ही जप, तप, ध्यान शुरू कर देंगे। इसके लिए कल्पवासी आने लगे हैं। लेकिन, किसी के भी चेहरे पर कोरोना संक्रमण को लेकर डर नहीं दिख रहा है। हालत यह है कि लोग बिना मास्क के ही मेला क्षेत्र से लेकर शिविरों तक भ्रमण कर रहे हैं।

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magh mela - फोटो : prayagraj
अभी तक मेला क्षेत्र के ज्यादातर शिविरों या प्रवेश मार्गों पर कहीं भी सैनिटाइजेशन भी नहीं कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए दूरियां भी नदारद हैं। चेहरे पर मास्क न होने पर बहरिया की मृदुला देवी कहती हैं कि वह भगवान के दर्शन और उनके ध्यान के लिए आई हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि कोरोना इस संगम पर नहीं आएगा।
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magh mela - फोटो : prayagraj
यहां वह बिना किसी चिंता के महीने भर कल्पवास करेंगी। इसी तरह कल्पवास के लिए पहुंचे सेवानिवृत्त दारोगा राम अधार पांडेय भी कोरोना संक्रमण से बेफिक्र हैं। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण उन तक नहीं पहुंचेगा। वह पूरे संयम और धैर्य के साथ इस मेले में जप, तप के लिए आए हैं।
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