मौनी अमावस्या के नहान से पहले संगम पर बड़ा हादसा होने से टल गया। शनिवार की सुबह 15 मिनट के अंतराल पर श्रद्धालुओं से भरी दो नावें डूब गईं। चीख पुकार के बीच पीएसी और एनडीआरएफ की टीमों ने जल पुलिस के साथ दोनों नावों पर सवार सभी 28 लोगों को डूबने से बचा लिया। एक महिला समेत एक दर्जन से अधिक लोगों को अस्पताल पहुंचा गया। संगम पर दो नावें डूबने की वजह से वहां काफी देर तक अफरातफरी का माहौल रहा।
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संगम पर सुबह से ही काफी भीड़ थी। तमाम लोग लोग नाव से नहाने जा रहे थे। करीब दस बजे 17 श्रद्धालुओं को लेकर एक नाव संगम पहुंची थी। श्रद्धालुओं के उतरते समय अचानक नाव अनियंत्रित हुई और उसमेंं पानी भरने लगा। चीख पुकार के बीच नाव पलट गई। श्रद्धालु डूबने लगे।
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पीएसी की बाढ़ राहत दल, एनडीआरएफ और जल पुलिस के जवान पानी मेंं कूद पड़े। एक एक करके संदीप शर्मा, ममता, विद्यावती, रवि प्रताप सिंह, प्रकाश, रामसखि, जीतेंद्र, रमेश, दीना, निवासी पडरौना, नीतू, रामकली, राधेश्याम, उमेश कुमार, जगेश्वरी देवी, उन्नत सिंह, गोपाल और जगदेव निवासी सिद्धार्थनगर को बचा लिया गया।
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दलनायक रामनरेश यादव ने बताया कि श्रद्धालुओंं को किनारे पहुंचाकर नाव को सीधा किया गया। एक महिला समेत कुछ श्रद्धालुओं को अस्पताल भेजा गया। इस घटना के ठीक 15 मिनट बाद एक प्राइवेट नाव जिस पर 11 लोग सवार थे, संगम पर डूबने लगी।
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नाव में अचानक पानी भरा और वह बैठ गई। श्रद्धालु पानी मेंं आ गए और चीख पुकार शुरू हो गई। पीएसी के बाढ़ राहत दल के जवान कूद पड़े और संजय गर्ग, सुनीता देवी, मुकेश सिंघल, मंजू सिंघल, विनोद सिंघल, शकुंतला देवी, उमा देवी, उमेश कुमार को बचा लिया गया। सभी दिल्ली के प्रीतमपुर इलाके के रहने वाले हैं।
दलनायक राम नरेश ने बताया कि श्रद्धालुओंं को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। दोनों नावों को जब्त कर जल पुलिस को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि पीएसी के जवान राकेश बिहारी पाठक, श्याम बहादुर बिंद, अशोक चौहान, अनिल कुमार, जगतधारी और महावीर यादव की श्रद्धालुओंं को बचाने में अहम भूमिका रही।