झूले की सजावट अस्त्र-शस्त्रों से की गई है। तलवार, फरसा, भाला, भुजाली उनके झूले में लगाई गई है। बाबा लोहे की कीलों के आसन पर बैठते हैं तो दो भक्त उनको बारी-बारी से झूला अग्नि कुंड पर झूला झुलाते रहते हैं। विश्वेश्वरानंद ने अमर उजाला को बताया कि विश्व कल्याण के लिए वह अपने शरीर तो तपा रहे हैं। फलाहार पर रहने वाले बाबा की इस कठिन साधना को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लग रही है।