Foreigner sadhvi
'यह देखने आए करोड़ों लोग सिर्फ नहाने क्यों आते हैं'
टूटी-फूटी हिन्दी में बताने लगीं, "मेरे गुरुजी ने मेरा नाम गंगापुरी रखा है और अब मैं इसी नाम से जानी जाती हूं। मैं रूस की रहने वाली हूं और पिछले 35 साल से भारत में ही रह रही हूं। मैं प्रयाग के अलावा हरिद्वार, नासिक और उज्जैन के कुंभ में भी कई बार जा चुकी हैं। वैसे तो मैं यहां पढ़ाई करने आई थी लेकिन हरिद्वार में मेरी मुलाकात कुछ साधु-संतों से हुई और फिर दो-तीन साल के बाद मैंने संन्यास ले लिया। संन्यास लेने के बाद मैं कभी रूस नहीं गई।"अखाड़ों के अलावा भी कई आध्यात्मिक गुरुओं के शिविरों में विदेशी संत रह रहे हैं। मसलन सच्चा बाबा आश्रम के शिविर में तमाम संत फ्रांस, जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया जैसे यूरोपीय देशों के अलावा दक्षिण अमरीकी देशों से भी हैं। सच्चा बाबा आश्रम में पर्यटक के तौर पर कुंभ मेला देखने आए ऑस्ट्रेलिया के एक व्यक्ति ने अपने आने का उद्देश्य कुछ इस तरह बयां किया, "मैं तो सिर्फ ये देखने आया हूं कि आखिर यहां ऐसा क्या है कि करोड़ों लोग सिर्फ नदी में नहाने के लिए चले आते हैं। ऐसा अद्भुत दृश्य मैंने पहले कभी नहीं देखा। यहां आकर पता चला कि अध्यात्म क्या चीज है. मुझे आए हुए एक हफ्ता हो गया है, हिन्दी नहीं समझता हूं, लेकिन महात्माओं के प्रवचन सुनने जाता हूं। साथ में स्वामी जी रहते हैं जो हमें अंग्रेजी में सब कुछ समझा देते हैं।" दरअसल, ऐसा नहीं है कि मेले में पहली बार कोई विदेशी श्रद्धालु या संत आए हों बल्कि हमेशा से आते रहे हैं।