दशनामी संन्यासी अखाड़ों का परिवार हजारों-हजार साधु-संन्यासियों में फैला होता है। इनमें अनुशासन बनाए रखने को अखाड़ों की अपनी कोतवाली है। इसके मुखिया को कोतवाल के नाम से पुकारते हैं, जिसके हाथ सदैव चांदी से मढ़ा एक विशेष दंड होता है। कोतवाली अखाड़े के गुरु कुटिया के पास ही स्थापित होती है, जिसके इर्द-गिर्द ही कोतवाल मौजूद रहते हैं। वहीं से पूरी छावनी की निगरानी करते हैं। यह कोतवाल अखाड़े की प्रत्येक मढ़ियों एवं दावों के जानकार होते हैं लिहाजा, हजारों-हजार साधुओं में भी ये सिर्फ पहनावा देखकर असली-नकली साधु की पहचान कर सकते हैं।