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तस्वीरों में देखें हिमालय की गुफा, कंदराओं से निकलकर संगम की रेती पर पहुंचे नागा बाबाओं का हठ योग

Mon, 21 Jan 2019 02:57 PM IST
shubham मुनेंद्र बाजपेयी, अमर उजाला, प्रयागराज
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Hath yogi
हिमालय की गुफा, कंदराओं से निकलकर कुंभ में संगम की रेती पर पहुंचे योगी नागा बाबाओं का हठ योग जारी है। सनातन धर्म की रक्षा, विश्व शांति, जनकल्याण के लिए इन तपस्वी बाबाओं के हठ योग में कोई वर्षों से हाथ उठाए हैं, तो कोई कई साल से खड़े ही हैं। उनकी कठिन तपस्या श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी है।
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Hath yogi
किसी वट वृक्ष की जटाओं की तरह इन बाबाओं के केश (बाल) उनके बड़े-बड़े नाखून, बड़ी बड़ी दाढ़ी और मुंह से अलख निरंजन का घोष किसी के लिए नतमस्तक होने को काफी है। अखाड़ों में देश ही नहीं विदेशी भक्तों का दिनभर जमावड़ा लगा रहता है। हठ योगी अलग हैं, लेकिन उनमें समानता एक है कि सभी आशीर्वाद देने में कोताही नहीं करते। सेल्फी लेने वालों को भी हठ योगी मायूस नहीं होने देते। जूना अखाड़े के नागा संत राधे पुरी जी महाराज 2011 से हठ योग पर हैं। उनका दाहिना हाथ ऊपर रहता है। स्थान पूछने पर नाराज होते हुए बोले, सपंूर्ण विश्व कल्याण का संकल्प है। आश्रम उज्जैन के आगर मालवा आमला गांव में है। फिर साधना में ठिकाना या ठहराव कहां। 
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जूना के ही नागा बाबा खड़े श्री संदीप पुरी जी महाराज वर्षों से खड़े ही हैंं। पैरों में सूजन न आए, इसलिए नमक नाममात्र का लेते हैं। एक समय फलाहार पर उनकी तपस्या जारी है। ऋषिेकेश आश्रम में रहने वाले पुरी महाराज जनकल्याण के साथ हरियाणा के हिसार बड़ाला में पेयजल भी उपलब्ध कराना चाहते हैं।

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नागा बाबा थानापति सोमवार गिरि महाराज कुंभ में बरेली से आए हैं। तीस वर्षों से केश और नाखून बढ़ाकर धूना के सामने अलख निरंजन, अलख निरंजन, दुख भंजन बोल आशीर्वाद दे रहे हैं। उनका मोर पंखी के साथ भक्तों का आशीर्वाद देना और फोटो खिंचाना हर किसी को भा रहा है।
 
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आनंद अखाड़ा के नागा बाबा दिगंबर दिवाकर भारती तीन वर्ष से अर्ध बाहु यानि एक हाथ हवा में उठाए तपस्या कर रहे हैं। ईश्वर से साक्षात्कार और जनकल्याण के लिए उनका हठ योग पिछले पांच साल से फलाहार के बूते हैं। उनका हाथ अब जाने-अनजाने में भी नीचे नहीं आता। रात में साधना के समय एक गम्छे से हाथ ऊपर और धूना के सामने संतों की जमात सत्संग करती है। 
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श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा के नागा बाबा हरवंश गिरि परमार्थ और सद्भावना के संकल्प को लेकर हठ योग पर हैं। पिछले नौ वर्ष से वह अनवरत खड़े हैं। उनकी कठिन तपस्या देखने वाले भक्त सवाल करते हैं तो उनका कहना है कि साधक भ्रमित न हों, खड़े का मतलब खड़ा होना ही होता है, परिस्थिति चाहे जो हो। इनकी एक खास बात और है कि नौ वर्ष से केश भी नहीं कटाए हैं। सिर पर जटाओं जैसे केश लिपटे हैं। राजस्थान के पुष्कर तीर्थ के आश्रम को वह अपनी तप स्थली बताते हैं। 
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