Female naga
पंच गुरु मिलकर बनाते हैं एक संन्यासिनी
महिलाओं के सन्यास की प्रक्रिया में पांच गुरु शामिल होते हैं। इनमें चोटी गुरु, लंटोगी गुरु, भगवा गुरु, भभूति गुरु और कंठी गुरु के नाम शामिल हैं।
अखिल भारतीय जूना संन्यासिनी राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत आराधना गिरि ने कहा कि अखाड़ा महिलाओं के संन्यास की परंपरा भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठतम परंपरा है। इसमें पहले वैरागी जीवन जीना पड़ता है। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वर्ष भर समर्पण और भक्ति की परीक्षा देनी पड़ती है। फिर गुरु मुहूर्त निकलवाते हैं और शिष्या बनाते हैं, लेकिन संन्यास संस्कार होता है गंगा के तट पर कुंभ में।
जूना अखाड़ा महंत मीरा पुरी ने कहा कि पहले अखाड़ों में नागा बनने और संन्यास लेने में पुरुषों का ही एकाधिकार और वर्चस्व था, लेकिन अब यह टूट रहा है। अखाड़ों में महिलाओं के लिए भी संन्यास के द्वार खुल गए हैं। महिलाएं घरेलू हिंसा, तिरस्कार, अपमानजनक बातों और उत्पीडऩ, दबाव से ऊब कर ईश्वर की शरण में भजन के साथ सद्गति के लिए आ रही हैं। इस कुंभ में महिलाओं के संन्यास लेने की परंपरा मजबूत हुई है।
जूना अखाड़ा महंत लक्ष्मी सरस्वती ने कहा कि सटीक आंकड़ा तो मैं नहीं दे सकती, लेकिन इतना जरूर है कि पिछले कुंछ की तुलना में इस कुंभ में महिला संन्यासिनियों की संख्या बढ़ी है। यह जूना अखाड़े के साथ ही सनातनी संस्कृति के लिए शुभ संकेत है।