Unique Sign
तीर्थपुरोहितों को अंग्रेजों ने भी दिए निशान
राजाओं, जमींदारों से इतर अंग्रेजों ने भी तीर्थ पुरोहितों को कई निशान दिए थे जो आज भी उनकी पहचान बने हुए हैं। इसमें पांच सिपाही, बादशाही झंडा आदि शामिल हैं। अल्मोड़ा के तत्कालीन कमिश्नर ने तीर्थपुरोहित शीतल प्रसाद तिवारी को पांच सिपाही का निशान दिया था। वहीं दुर्गा प्रसाद शर्मा के पूर्वजों को ‘यूनियन जैक’ का झंडा मिला था, जो आजादी के बाद तिरंगे के रूप में तब्दील हो गया।
अजब-अनूठे निशान
तीर्थ पुरोहितों के झंडों के निशान में कलछुल, कनस्टर, नीम की टेरी, बेग-संदूक, ढाल लालटेन, तीन लोटा व चूल्हा, किला, भुजाली गंगाजी आदि शामिल हैं। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे निशान हैं, जिन्हें काल्पनिक तौर पर रखा गया है। इसमें सोने का कटोरा, चांदी का कटोरा, पीतल का पन्ना, चांदी का नारियल, सोने का नारियल, पीतल का घोड़ा, रुपया-मुहर आदि।
साधनों के नाम पर भी निशान
तीर्थपुरोहितों के निशान साधनों के नाम पर भी हैं। इसमें रेल का कोयले वाला इंजन, स्कूटर, कार, ट्रैक्टर, जहाज आदि शामिल हैं।