कुंभ क्षेत्र में स्थापित भूले बिसरे शिवरों से अब जो आवाजें आ रही हैं, उसे सुनकर कलेजा दहल रहा है। पिछले करीब पांच दिनों से इन शिविरों में अपने से बिछड़ने वालों में ज्यादातर माताएं ही रह गई हैं, जिनकी उम्र 60 से लेकर 90 वर्ष के बीच है। इनकी आंखें रो-रोकर सूज गई हैं, आंसू सूख चुके हैं और गले में आवाज रुक गई है। यह सभी माताएं अपने बच्चों, परिजनों के साथ कुंभ में डुबकी लगाने शायद यह सोचकर आई थीं कि जीवन की आखिरी बेला में गंगा मइया को प्रणाम कर लें और संतों के चरण रज माथे पर लगाकर जीवन धन्य बना लें।