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तस्वीरें: मौनी पर शाही जुलूस की शान बनें नए नागा, डुबकी लगाने की तैयारियों में बीती रात

Mon, 04 Feb 2019 07:50 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Naga Sadhu
संगम की रेती की शान अखाड़े सोमवार को मौनी अमावस्या स्नानपर्व पर दूसरी शाही डुबकी लगा रहे हैं। अखाड़े सिर्फ कुंभपर्वों में ही स्नान को आते हैं। ऐसे में आस्था, परंपरा और संस्कार के संगम के साथ त्रिवेणी, कुंभ पर्व पर अखाड़ों के शाही स्नान का साक्षी बने। देवता संग नागा संन्यासी शैव अखाड़ों के शाही जुलूस का नेतृत्व किया लेकिन, मौनी अमावस्या स्नानपर्व पर मकर संक्रांति के बाद बने नए नागा संन्यासी शाही जुलूस की शान बनें। संतों, महामंडलेश्वरों के साथ ही नए बने नागा संन्यासियों में डुबकी लगाने को लेकर सबसे ज्यादा आतुरता रही।
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Naga Sadhu
नागा संन्यासियों ने धूना के सामने बैठकर पूरी रात ओम नम:शिवाय का मंत्र जप करते हुए पवित्र भभूत तैयार की। साथ ही गुरुमंत्र का जप भी किया। शाही जुलूस से पहले पंचदशनाम जूना सहित अटल और आवाहन अखाड़े की छावनी में धर्मध्वजा के नीचे नए बने संन्यासियों की लंगोटी खोलकर उन्हें नागा बनाया जाएगा। सभी नए नागा संन्यासी संन्यास दीक्षा के बाद पहली बार शाही स्नान में अखाड़ों की शान बनकर संगम में डुबकी लगाए।
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Naga Sadhu
नए बने नागा संन्यासियों की तरह ही जूना और आवाहन की ओर से बनाई गईं संन्यासिनियां भी अखाड़े के शाही स्नान में शामिल होंगी। सबसे पहले देवता और भाला निशान, फिर नागा और तब महामंडलेश्वरों, संतों और संग आए श्रद्धालुओं की ओर से डुबकी लगाई ।अभूतपूर्व उत्सव के तहत पर्व पर डुबकी से पहले अखाड़ों की छावनी में अद्भुत उत्साह रहा। पूरी रात तैयारियों में ही बीती। अखाड़े के सचिवों ने देवता, निशान ले जाने के लिए संन्यासियों की तैनाती की तो आचार्य महामंडलेश्वर सहित अन्य महामंडलेश्वरों के रथों को भी दोबारा दुरुस्त किया गया। पेशवाई की तरह ही शाही स्नान जुलूस में भी देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए बैंडबाजा वालों ने अपनी ड्रेस दुरुस्त करने के साथ ही मांगलिक धुनों का अभ्यास किया। आचार्य और महामंडलेश्वरों के अतिरिक्त उनके संग देश-विदेश के श्रद्धालु भी शाही जुलूस में अंग बनें।

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Naga Sadhu
महापर्व पर सबसे पहले महानिर्वाणी की डुबकी
मौनी अमावस्या के दूसरे शाही स्नान महापर्व की शुरुआत सवा छह बजे शुरू हो गई। परंपरा के मुताबिक सबसे पहले महानिर्वाणी और उनके संग अटल अखाड़े के संत, नागा संन्यासी डुबकी लगाए। सभी तकरीबन एक घंटे पहले अखाड़े की छावनी से निकलकर नियत समय पर संगम नोज पहुंचकर स्नान किया। इसके बाद निरंजनी और आनंद अखाड़े के नागा, संत, आचार्य और महामंडलेश्वर डुबकी लगाए। फिर जूना अखाड़े के साथ आवाहन, अग्नि, संन्यासिनी अखाड़ा और फिर किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर डुबकी लगाएंगी।
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Female Naga Sadhu - फोटो : Social Media
वहीं सुबह 9:40 बजे से बैरागी अखाड़ों, निर्वाणी अनी, निर्मोही अनी और दिगंबर अनी अखाड़े परंपरागत रूप से शाही जुलूस निकालकर डुबकी लगाने पहुंचेंगे। बैरागियों के बाद उदासीन परंपरा के पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, बड़ा उदासीन और अंत में निर्मल अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे। अखाड़ों की छावनी से लेकर मुख्य संगम नोज तक खास बैरीकेडिंग की गई है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के मुताबिक प्रत्येक अखाड़े के लिए चालीस मिनट का समय तय किया गया है। बीच में बीस मिनट के अंतराल में घाट खाली कराने सहित सफाई की जाएगी।
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