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कुंभ 2019: हिंदुओं के कुंभ को रौशन करते 'मुल्ला जी', धार्मिक एकता की फैला रहे रोशनी

Sun, 27 Jan 2019 09:38 PM IST
shubham नागेंद्र पाल, अमर उजाला, प्रयागराज
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Mulla Ji
प्रयागराज में हिंदुओं के सबसे बड़े आस्था के मेले कुंभ में धार्मिक एकता का जीता जागता उदाहरण पेश कर रहे हैं मुल्ला महमूद। कुंभ में भगवाधारी साधुओं की भीड़ में मुस्लिम टोपी में सफेद दाढ़ियों वाले मुल्ला जी की एक अलग ही पहचान है। कुंभ में आने वालों को 'मुल्ला जी लाइट वाले' का बोर्ड देखने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यहां आने वाले साधुओं के लिए वह बेहद खास हैं। मुल्ला जी 13 अखाड़ों में सबसे बड़े जूना अखाड़े को पिछले 11 वर्षों से रौशन करते आ रहे हैं। प्रयाग में मुल्ली जी का ये चौथा कुंभ है। आगे की स्लाइड में पढ़े मुल्ली जी की दिलचस्प कहानी...
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फनगर जिले के रहने वाले 77 वर्षीय मुल्ला महमूद पिछले तीन दशक से कोई भी कुंभ या अर्धकुंभ नहीं छोड़ते हैं और हर कुंभ के दौरान मेले में ही रहकर अपना व्यवसाय चलाते हैं। जूना अखाड़े के साधु-संतों और महंत से उनकी अच्छी बनती है, इसलिए अखाड़े में ही उनके रहने के लिए टेंट की व्यवस्था की गई है। बिजली की फिटिंग से लेकर कनेक्शन तक जो भी काम होता है, मुल्ला जी की टीम ही करती है। मुल्ला जी के पास पंद्रह लोगों की टीम है। इस टीम में भी हिंदु और मुस्लिम भी शामिल हैं। टीम में काम करने वाले लोग हरिद्वार, ऋषिकेश, मुजफ्फरनगर और शाहजहांपुर के रहने वाले हैं।

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मुल्ली जी को जितना जानने की कोशिश की उनकी कहानी और दिलचस्प लगती गई। मुल्ली जी की टीम में काम करने वाला एक हिंदु इलेक्ट्रीशियन अनिल बताता है कि, वह मुल्ला जी के साथ पिछले 5 वर्षों से काम कर रहा है। ऋषिकेश में मुल्ला जी से मुलाकात हुई थी, तब से लगातार उन्हीं के साथ काम कर रहा हूं। यहां किसी तरह का भेदभाव महसूस नहीं होता है। सभी का खाना एक ही जगह बनता है और सभी एक ही जगह बैठकर खाते हैं। जूना अखाड़े के अलावा भी तमाम लोगों के शिविर में बिजली की कोई समस्या होती है तो मुल्ला जी और उनकी टीम संकट मोचक बनकर खड़ी रहती है।

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बातचीत के दौरान एक दिलचस्प बात और पता चली... मुल्ला जी के यहां खाना बनाने वाले के बारे में। मुल्ला जी समते टीम में काम करने वाले सभी लोगों के लिए खाना बनाना का काम करते हैं अनिल कुमार। अनिल कुमार हिंदू हैं और पंडित जाति से आते हैं। फिर भी इन्हें किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है और कई वर्षों से मुल्ली जी के साथ काम कर रहे हैं।अनिल का कहना है कि, बेराजगारी के दिनों में हरिद्वार में मुल्ला जी के साथ सम्पर्क हुआ। तभी से इनके साथ काम कर रहे हैं। 

 
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मुल्ली जी के नेतृत्व में जूना अखाड़े में बिजली का हर काम इतनी सहजता से चल रहा है कि यहां के सभी साधू-संत इनके काम से बहुत खुश हैं। जूना अखाड़े का जहां भी काम होता है मुल्ला जी को याद किया जाता है। मुल्ला जी बताते हैं कि अब तक उन्होंने हरिद्वार में 4 कुंभ, उज्जैन में 3 कुंभ और प्रयाग में यह उनका चौथा कुंभ है। मुल्ली जी से जब जानना चाहा कि उन्हें जूना अखाड़े का काम कैसे मिला तो उन्होंने बताया कि, 1986 में हरिद्वार में कुंभ में नरेन्द्र नामक व्यक्ति के जरिए जूना अखाड़ा के साधुओं से मिले थे। तब से ही वो जूना अखाड़े की लाइटिंग का पूरा काम संभाल रहे हैं। जूना अखाड़े के सचिव महंत हरि गिरि, महंत प्रेम गिरी और अखाड़े के मेला प्रभारी विद्यानंद सरस्वती से उनका गहरा लगाव है। इन्हीं के जरिए उन्हें काम मिलता है।
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मुल्ला जी के बिजली का पूरा काम मोहम्मद सलीम (52) देखते हैं। सलीम बताते हैं कि, 'मैं पूरा कुंभ मेला खत्म होने तक टेंट में ही रहता हूं। दिन हो या रात कभी भी बिजली की कोई समस्या अखाड़ें में आती है तो तुरंत हम मिस्त्री को भेजकर ठीक करवाते हैं। चूंकी मुल्ला जी अब बुजुर्ग हो गए हैं इसलिए अब वह सिर्फ निर्देश देते हैं। सारा काम हमें ही देखना होता है। आजतक हमें यहां किसी तरह का भेदभाव महसूस नहीं हुआ। हम सभी लोग एक परिवार की तरह रहते हैं और अपना काम पूरी ईमानदारी से करते हैं। मेला खत्म होने के बाद भी हमलोग मुल्ला जी के साथ ही काम करते हैं।'
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संगम की धरती पर तीन वक्त की नमाज पढ़ते हैं मुल्ला जी
आस्था की नगरी में मुजफ्फरनगर से आए मुल्ला महमूद पांच वक्त का नमाज पढ़ते हैं। इनका मानना है कि अल्ला और भगवान तो दोनों एक ही हैं। यहं नमाज पढ़ने से कोई नहीं रोकता है। इस दौरान किसी प्रकार कोई दिक्कत नहीं होती है। सभी टीम के साथ पूरी तरह मिलकर रहते हैं। 

कमाई के बारे में पूछने पर मुहम्मद महमूद हंसते हुए कहते हैं, कमाई क्या...कमाई तो कुछ भी नहीं है। रहने-खाने का खर्च निकल जाए वही बहुत है। कमाने के मकसद से हम आते भी नहीं है। बस दाल-रोटी चल जाए, साधुओं की संगत अपने आप ही आनंद देने वाली होती है,और क्या चाहिए ?

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