स्वामी नरेंद्रानंद गाय और बछिया के साथ
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पिछले कुछ समय से जिस गाय और बछिया को स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में तालाबंद किया जा रहा था, कुंभ का स्नान शुरू होते ही इनकी मांग संगम की रेती पर तेजी से बढ़ गई है। गऊदान देने के लिए पिछले तीन दिनों में संगम क्षेत्र में पांच हजार से ज्यादा गाय और बछिया प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लाई जा चुकी है।
शास्त्रों में अर्थ और मोक्ष दोनों की प्राप्ति के लिए गऊ का पूजन और दान करने की व्यवस्था बनाई गई है। गाय की सेवा को ईश्वर की सेवा बताया गया है। कुंभ परिसर में गाय और बछिया की सबसे ज्यादा डिमांड कल्पवासियों के डेरों से आ रही है। कल्पवासियों में कुछ ने तो अपनी पूजा पद्धति के अनुसार गऊ दान के रूप में अपने गुरू को उसके बदले धन देने का मन बनया है, जबकि ज्यादातर लोग गऊदान से ही पुण्य का लाभ लेना चाहते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादातर गाय और बछिया लाई जा रही हैं। कुछ शिविरों में तो दूध देने वाली गायों और बछिया का दान किया गया है। फाफामऊ के उस पार, अंधवा मोड़ के आगे, नैनी के पास से ही गाय और बछिया के झुंड को ट्रकों से उतारकर लाया जा रहा है। यह सिलसिला पिछले तीन दिनों से जारी है। एक गऊ पालक ने बताया कि ऐसे कई लोग मिले जिन्होंने अपनी गाय और बछिया को ऐसे ही छोड़ दिया था, अब उसको खोजने में जुटे हैँ। बिना दूध देने वाली गाय और बछिया के लिए भी दान देने वाले मुंंह मांगी रकम भी दे रहे हैं।