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कुंभ 2019: संक्रांति का स्नान साथ में गइया-बछिया का दान, कुंभ में बढ़ी गाय और बछिया की डिमांड

Mon, 14 Jan 2019 11:29 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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स्वामी नरेंद्रानंद गाय और बछिया के साथ - फोटो : अमर उजाला
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पिछले कुछ समय से जिस गाय और बछिया को स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में  तालाबंद किया जा रहा था, कुंभ का स्नान शुरू होते ही इनकी मांग संगम की रेती पर तेजी से बढ़ गई है। गऊदान देने के लिए पिछले तीन दिनों में संगम क्षेत्र में पांच हजार से ज्यादा गाय और बछिया प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लाई जा चुकी है।

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शास्त्रों में अर्थ और मोक्ष दोनों की प्राप्ति के लिए गऊ का पूजन और दान करने की व्यवस्था बनाई गई है। गाय की सेवा को ईश्वर की सेवा बताया गया है। कुंभ परिसर में गाय और बछिया की सबसे ज्यादा डिमांड कल्पवासियों के डेरों से आ रही है। कल्पवासियों में कुछ ने तो अपनी पूजा पद्धति के अनुसार गऊ दान के रूप में अपने गुरू को उसके बदले धन देने का मन बनया है, जबकि ज्यादातर लोग गऊदान से ही पुण्य का लाभ लेना चाहते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादातर गाय और बछिया लाई जा रही हैं। कुछ शिविरों में तो दूध देने वाली गायों और बछिया का दान किया गया है। फाफामऊ के उस पार, अंधवा मोड़ के आगे, नैनी के पास से ही गाय और बछिया के झुंड को ट्रकों से उतारकर लाया जा रहा है। यह सिलसिला पिछले तीन दिनों से जारी है। एक गऊ पालक ने बताया कि ऐसे कई लोग मिले जिन्होंने अपनी गाय और बछिया को ऐसे ही छोड़ दिया था, अब उसको खोजने में जुटे हैँ। बिना दूध देने वाली गाय और बछिया के लिए भी दान देने वाले मुंंह मांगी रकम भी दे रहे हैं। 

शंकराचार्य के शिविर में पहुंची गइया बछिया

गइया भी लाए हैं, उसका चारा भी
बिहार से आए गया प्रसाद झा अपने साथ गाय भी लेकर आए और उसका चारा भी। उनका कहना है कि जब अपने गुरु जी को गाय का दान दे देंगे तो उसको खिलाने के लिए चारा भी चाहिए। इसीलिए चारा उन्होंने यहीं रास्ते में ही खरीद लिया था। 

शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती के सेक्टर १४ में बने शिविर में भी दो दिन पहले ही दान में दी गई गाय और बछिया भी लाई गई है। स्वामी नरेंद्रानंद का कहना है कि गाय का दान सभी दान से सर्वोत्तम है। वैज्ञानिक रूप से भी गाय मनुष्य के जीवन में बहुत उपयोगी मानी जाती है। गाय का घी यदि आठ वर्ष की उम्र तक आंखों पर लगाया जाए तो जीवन भर आंखी की रोशनी दिक्कत नहीं होगी। इसी तरह गाय के दूध का सेवन करने से दिमाग काफी तेज होता है। 
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गाय, बछिया का महत्व

गाय की सेवा, दर्शन से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है
लगातार गाय की सेवा से संतान का सुख मिलता है
फसलों में गाय के गोबर की खाद डालने से उत्पादन के साथ फसल की गुणवत्ता बढ़ जाती है।
गाय का गोबर, मूत्र हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है।
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