सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं, मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होने लगते हैं और देवताओं का दिन प्रारम्भ होता है इसलिए मकर संक्रांति का महत्व सर्वाधिक माना गया है। संक्रांति काल में जो भी वस्तु दान की जाती है या कृत्य-कृत्यादि जो भी दिया जाता है, सूर्य नारायण उसे जन्म जन्मान्तर प्रदान करते रहते हैं। ज्योतिषाचर्य गुंजन वार्ष्णेय के अनुसार कुम्भ पर्व पर मकर संक्रांति के दिन स्नान, पुण्य, दान, जप, धार्मिक अनुष्ठानों का बहुत महत्व है। मकर संक्रांति के दिन दिया हुआ दान ‘पुनर्जन्म’ होने पर सौ गुणा होकर प्राप्त होता है। संगम के पावन तट पर इस दिन हजारों श्रद्धालुओं को स्नान, दानादि द्वारा पुण्यार्जन करते देखा जा सकता है। मकर संक्रांति पर्व के महत्व के संबंध में संत तुलसीदास जी कहते हैं, माघ मकर रवि गति होई। तीरथपतिहिं आवै सब कोई।ज्योतिषाचार्य के अनुसार सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश बारह राशियों को इस प्रकार फल प्रदान करेगा... आगे की स्लाइड में पढ़ें...
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राशि
मेष राशि- गोचर से दशम भाव में सूर्य के जाने पर धन, स्वास्थ्य, मित्र आदि का सुख प्राप्त होता है। राज्य अधकारियों और प्रतिष्ठित लोगों से मित्रता बढ़ती है। सज्जनों द्वारा लाभ होता है, प्रत्येक कार्य में सफलता मिलती है। पदोन्नति का सुअवसर प्राप्त होता है, मान, गौरव तथा प्रताप बढ़ता है।
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राशि
वृष राशि- गोचर से नवम स्थान में सूर्य के जाने पर कांति का क्षय, झूठा आरोप, बिना कारण धन और पुण्य की हानि, आय की कमी, रोग एवं अशांति उत्पन्न होती है। बड़ों से तथा मित्रों तथा भाइयों से विरोध रहता है। अपमान का भय रहता है, हर उद्योग में असफलता मिलने के कारण व्यक्ति दीन बन जाता है।
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मिथुन
मिथुन राशि - गोचर से अष्टम स्थान में सूर्य के जाने पर जातक को शत्रुओं से भय, अकारण वाद-विवाद होता है, अधिक खर्च होता है, अपमान का विशेष भय रहता है।
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राशि
कर्क राशि - गोचर से सातवें स्थान में सूर्य के जाने से दाम्पत्य जीवन में वैमनस्य की उत्पत्ति होती है, स्त्री और पुत्र बीमार रहते हैं। कार्यों में असफलताएं प्राप्त होती हैं। व्यवसाय में बाधाऐं उत्पन्न होती हैं, कष्टकारी यात्राएं करती पड़ती हैं। उदर पीड़ा, सिर पीड़ा आदि रोग होते हैं। धन और मानहानि के कारण व्यक्ति के मन को क्लेश रहता है।
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राशि
सिंह राशि - गोचर से छठे स्थान में सूर्य के जाने से कार्य सिद्धि और सुख की प्राप्ति होती है, अन्न-वस्त्र आदि का लाभ होता है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। रोगों का नाश होता है, राज्याधिकारियों से लाभ रहता है, निज प्रताप में वृद्धि होती है, शोक-मोह आदि भावों का नाश होकर चित्त और शरीर स्वस्थ रहते हैं।
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राशि
कन्या राशि - गोचर से पंचम भाव में सूर्य के जाने मानसिक भ्रम उत्पन्न होता है। शारीरिक और मानसिक शक्ति में कमी आती है। बुद्धि भ्रमित होने लगती है, ऐसे में जातक को धनहानि भी उठानी पड़ती है, स्वयं और संतान को रोग उत्पन्न होता है, राज्याधिकारियों से वाद-विवाद बढ़ता है, यात्रा में दुर्घटनाएं होती हैं। व्यक्ति दीनता का अनुभव करता है।
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राशि
तुला राशि - गोचर में चतुर्थ स्थान में सूर्य के जाने से मानसिक और शारीरिक व्यथा रहती है, घरेलू झगड़ों के कारण सुखों में कमी आ जाती है, जमीन-जायदाद संबंधी अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है, अच्छी सुख सामग्री नहीं मिलती, यात्रा में असुविधाएं होती हैं। लोग परेशान करते हैं, वैवाहिक सुख में भी अड़चन आती है, मान-हानि की सम्भावना रहती है।
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राशि
वृश्चिक राशि - गोचर से तृतीय स्थान में सूर्य के जाने से रोगों से मुक्ति, सुख चैन, शुभफल मिलते हैं। सज्जनों एवं उच्च राज्याधिकारियों से मेल-मुलाकात होती है। पुत्रों तथा मित्रों से धन-लाभ तथा सम्मान होता है। शत्रुओं की सरलता से पराजय होती है तथा व्यक्ति लक्ष्मी और मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। इस अवधि में प्रायः पद की प्राप्ति होती है और व्यक्ति सबसे शुभ व्यवहार करता है।
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राशि
धनु राशि - गोचर से द्वितीय स्थान में सूर्य के जाने से दुष्ट और बुरे कर्म वाले लोगों से मुलाकात होती है। व्यक्ति का निज का स्वभाव भी धूर्तता तथा नीचता की ओर अग्रसर होता है, सिर और आंखों में पीड़ा रहती है, व्यापार और धन-सम्पत्ति की हानि का भय रहता है। मित्रों और संबंधियों से झगड़ा होता है और व्यक्ति का पूरा महीना सुख रहित व्यतीत होता है।
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राशि
मकर राशि - गोचर से लग्न भाव में सूर्य के आने से धन का नाश होता है, मान-सम्मान में कमी आती है, स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता, हृदय रोग, थकावट, उदर विकार, पेट तथा नेत्र के रोगों से कष्ट उठाना पड़ता है। प्रत्येक कार्य विलम्ब से सम्पन्न होता है और समय पर भोजन नहीं मिलता, निरूद्देश्य भ्रमण होता है और व्यक्ति को अपने परिवार से अलग होना पड़ता है। संबंधियों, मित्रों और सज्जनों से झगड़ा होने से मानसिक व्यथा रहती है।
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राशि
कुम्भ राशि - गोचर से द्वादश भाव में सूर्य के जाने से दूर देश का भ्रमण होता है, कार्य एवं पद की हानि होती है, व्यय अधिक रहता है, कई प्रकार की कठिनाइयां झेलनी पड़ती है, जवर आदि रोग उत्पन्न होते हैं। पेट में अधिक गड़बड़ रहती है, राज्य की ओर से विरोध होता है। आंखों में कष्ट की सम्भावना रहती है। मित्रों का व्यवहार भी शत्रुतापूर्ण हो जाता है, अपमान का भय रहता है।
मीन राशि - गोचर से एकादश भाव में सूर्य के जाने से हर प्रकार का लाभ, धन प्राप्ति, उत्तम भोजन, नवीन पद और बड़ों के अनुग्रह की प्राप्ति होती है। स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आध्यात्मिक एवं मांगलिक कार्य होते रहते हैं। सात्विकता में वृद्धि होती है, राज्य की ओर से कृपा की प्राप्ति होती है, पदोन्नति का यह समय होता है, पित्तादि में लाभ रहता है।