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सर्वसमावेशी संस्कृति कुंभ का किया गया आयोजन, मंच से उठी राम मंदिर निर्माण की बात

Thu, 31 Jan 2019 07:36 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला प्रयागराज
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सर्वसमावेशी संस्कृति कुंभ
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संगम की रेती पर चल रहे कुंभ मेले को आमजन से जोड़ने और इसके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त की ओर से बुधवार को कुंभ क्षेत्र में सर्व समावेशी कुंभ का आयोजन किया गया। परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में संतों एवं वक्ताओं ने कुंभ की संस्कृति को दूर-दूर तक पहुंचाने के लिए सरकार के प्रयास की सराहना की। कहा कि संतों के उपदेश और संदेश को महत्व दिया जाए। मंच से राम मंदिर निर्माण की बात भी उठाई गई।

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सर्व समावेशी कुंभ के मंच से परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि इस आयोजन में संस्कार एवं दर्शन का समावेश है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति तालमेल वाली है, घालमेल वाली नहीं। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद लोगों से संस्कृति बचाने की अपील की। कहा कि कल्चर बचेगा तो प्रकृति बचेगी और प्रकृति बचेगी तभी देश की संतति बचेगी। प्रयागराज कुंभ से यह संदेश पूरे विश्व में जाना चाहिए। आरएसएस के बारे में गलत धारणा पाल कर बैठे लोगों से इसे ठीक से समझने को कहा।

कहा कि देश की सेवा में लगा आरएसएस कभी देश तोड़ने वाला नहीं हो सकता। उन्होंने नदियों को बचाने का आह्वान किया और कहा कि पानी है तो प्रयाग है। इसी क्रम में जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि भारत की संत सत्ता पूरे विश्व का नेतृत्व कर रही है। कहा कि जितने विचार भारत ने दिए, उतने विश्व के किसी देश ने नहीं दिए। पाश्चात्य देश पूरे विश्व को बाजार समझते हैं जबकि, भारत पूरे विश्व को परिवार मानता है। उन्होंने सर्व समावेशी कुंभ के आयोजकों को एक मंच पर सभी पंथ धर्मावलम्बियों को एकजुट करने के लिए बधाई दी।

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वहीं स्वामी वासुदेवानंद नेे कहा कि हमें इस मंच से दुनिया से आतंक, व्यभिचार, अनाचार, अत्याचार जैसी सभी बुराईयों के समूल नाश का संकल्प लेना होगा, तभी विश्व का कल्याण होगा। सर्व समावेशी कुंभ में योग गुरू रामदेव ने भी हिस्सा लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसा भारत बनाना है, जो विश्व का नेतृत्व करे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर, शिव मंदिर एवं कृष्ण मंदिर बने, यही हमारी कामना है। हम तो सहचार्यता के उपासक हैं। हम भिन्न जाति, धर्म,मत, सम्प्रदाय से हो सकते हैं, किंतु उससे पूर्व मां भारती की संतान हैं। सत्य और जगत का कल्याण हमारे सिद्धांत हैं। कहा कि हम भौतिकता के शिखर पर हों तो आध्यात्मिकता में भी हम सर्वश्रेष्ठ हों।
 
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