sadhvi saraswati giri
उन्होंने बताया कि उनकी नजर में सनातनी संस्कृति -संस्कार दुनिया में सबसे बेजोड़ हैं। इसी वजह से उन्होंने संन्यास ले लिया, लेकिन वह चिकित्सकीय पेशा नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने बताया कि संन्यासिनी के रूप में ही वह निरंतर दुखियों, मरीजों की सेवा करती रहेंगी। इससे पहले रूस की लीलिया, यूक्रेन की अविरंजिनी ने भी कुंभ में संन्यास धारण कर लिया था।