संगम तट पर कुंभ में डिजिटल बाबा के दर्शन कीजिए। संगम की रेती पर सनातनी संस्कृति की अलख जगा रहे इन डिजिटल बाबा के हाथों में दंड-कमंडल, खप्पर, त्रिशूल या तलवार की जगह मैकबुक, ट्राईपॉड, सेल्फी स्टिक, महंगे आईफोन, लेप्पल माइक आ गया है।
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Digital Baba
संगम की रेती पर बने धूनों, शिविरों में कथा, सत्संग, भजन, ध्यान, जप, तप, योग करने वाले बाबाओं से अलग इन डिजिटल बाबाओं ने भारतीय अध्यात्म और सांस्कृतिक परंपरा को संचार तकनीक को आधार बनाया है।
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डिजिटल बाबा ट्विटल हैंडल, तरह-तरह के एप्लीकेशन, यू -ट्यूब, फेसबुक के जरिए कुंभ को ग्लोबल बना रहे हैं। इन डिजिटल बाबाओं की कोशिश से जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया का सपना साकार हो रहा है, वहीं दिव्य कुंभ की मनोरम छटा से यूरोप, एशिया व आसियान देशों के लोग लाइव जुड़कर परिचित हो रहे हैं।
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रामानंदाचार्य की वैष्णव परंपरा के युवा संन्यासी राम शंकर दास ने अपनी पहचान डिजिटल बाबा के रूप में बना ली है। कुंभ में डिजिटल बाबा से लाइव जुड़ने और उनसे मिलने के लिए भीड़ लग जा रही है।
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वह संगम नोज से लेकर, मूल अक्षयवट, बड़े हनुमान मंदिर के अलावा सेक्टर-16में अखाड़ों से शिविरों में नागाओं के धूने तक को सुबह से शाम तक लाइव कर रहे हैं। देवरिया के खजुरी भट्ट गांव निवासी रामशंकर बी.कॉम तक पढ़ाई करने के बाद 20वर्ष की आयु में घर का परित्याग कर आध्यात्मिक स्थलों की खोज और साधना के लिए संन्यासी बन गए।
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अयोध्या के संत स्वामी शिव चरण दास महाराज से उन्होंने दीक्षा ली। संचार माध्यमों के जरिए भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्म का संदेश देने वाले रामशंकर दास अब डिजिटल बाबा के रूप में कुंभ में छाए हुए हैं। इनकी तरह की जीयर स्वामी के शिविर में अखिलेश बाबा मैकबुक, फेसबुक के जरिए कुंभ लाइव कर रहे हैं।
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द्वारिका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की शिष्या साध्वी पूर्णांबा भी जिडिटल फेज में पहुंच गईं हैं। वह कुंभ के हर हिस्से को फेसबुक लाइव व ट्विटर के जरिए दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रही हैं।
फेसबुक, ट्विटर के अलावा इंटरनेशनल एप्लीकेशन के जरिए वह कुंभ के विविध रंगों से से पूरी दुनिया को जोड़ रहे हैं। नागा संन्यासियों के जीवन से लेकर संगम नोज तक कुंभ के हर आकर्षण को डिजिटल बाबा संचार क्रांति के जरिए विश्व भर को लुभा रहे हैं।