विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक समागम के कुंभ में पहुंचे कई बाबाओं के हाथों में दंड कमंडल, रामनाम की माला की जगह हथियारों ने ले ली है। संगम तट पर ज्ञान-ध्यान, जप-तप, यज्ञ-भजन के साथ संन्यासियों के असलहों के शौक देखते रह जाएंगे। शिविरों में असलहाधारी बाबाओं का संगम कम दिलचस्प नहीं है। दंड-कमंडल की जगह कमर में कारतूस की पेटी, रिवाल्वर से लैस बाबा दर्शन दे रहे हैं। किसी के हाथ में दो नाली बंदूक है तो किसी के हाथ में राइफल और पिस्तौल। ऐसे असलहाधारी बाबाओं के दर्शन और आशीर्वाद के लिए शिविरों में भीड़ लग रही है।