महिला
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पोस्टर में रिवॉल्वर के उस रूपक को और पोस्टर में नायिका की मुद्रा को मैं लड़कियों की आँखों से देखना, समझना चाहता था। भूगोल डिपार्टमेंट के सामने मेहता हॉल में हरी घास में लड़कियों की एक टोली बैठी थी। गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ, बस्ती, गोंडा, जौनपुर, सुल्तानपुर और इलाहाबाद के दारागंज, कीडगंज, अहियापुर की लड़कियों की एक टोली। अलग अलग सामाजिक पृष्ठभूमि की लड़कियां एक साझा स्वप्न लिए बैठीं थी। सचेत और सतर्क। कल के निर्माण और संधान में लीन स्वप्निल आंखों से भविष्य देखती लड़कियां। बिना किसी जान पहचान के मैंने उस पोस्टर का ज़िक्र उन लड़कियों से किया और बस एक छोटा सा सवाल किया, "आप सब इस तस्वीर को कैसे देखतीं हैं?"
इस सवाल के बाद जो ज़वाब मुझ तक पहुँचे उसने उस पोस्टर के अलग ही अर्थ खोले थे। मैं उन सब लड़कियों की कही बातों का सार यहां लिख रहा हूँ। उन्होंने कहा कि रिवॉल्वर एक मेटाफ़र है। जो यह कह रहा है कि लड़कियाँ अब चुनौती स्वीकार कर चुकी हैं। किसी भी लड़ाई के लिए अब लड़कियाँ तैयार हैं। सपनों के लिए लड़ने और रूढ़ियों को तोड़ने के लिए लड़कियों ने मन बना लिया है। किसी एग्ज़ाम को टॉप करने के बाद जो विक्ट्री साइन दिखाती लड़की है वो भी एक हथियार तान कर खड़ी है। वहां हथियार मेधा का है। खेल के मैदान पर जीत के बाद मुस्कुराती हुई लड़की अपनी मेहनत का हथियार लिए खड़ी है। अब लड़कियों ने दहलीज़ लांघ कर मोर्चे चुन लिए हैं।